For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

समीक्षा पुस्तक : नागफनी के दंश

प्रकाशक : बोधि प्रकाशन, सी-46, सुदर्शनपुरा इंडस्ट्रियल एरिया एक्स्टेंशन, नाला रोड,

22 गोदाम, जयपुर-302006.

मूल्य : रूपये १२०/-

 

 

 “नागफनी के दंश” रेखा लोढ़ा ‘स्मित’ द्वारा रचित दोहों का एक उत्तम संग्रह है. इस पुस्तक में प्रकाशित 728 दोहे किसी एक विषय पर न होकर भिन्न-भिन्न विषयों पर दो पंक्तियों में अपनी बात उसी तीव्रता के साथ कह रहे हैं जिसके लिए दोहा छंद प्रसिद्द है अर्थात इसमें ‘घाव करे गंभीर’ वाली बात बनती दीख रही है.

 

 पाठक को इस पुस्तक में नारी पीड़ा, आम मानव की पीड़ा, ,मानवता धर्म और रिश्तों के साथ ही त्यौहारों के सुवास पर उत्कृष्ट दोहे पढने मिलेंगे. कोई भी रचनाकार आज देश की राजनीतिक परिदृश्य पर रचनाएं न करता हो ऐसा असंभव ही प्रतीत होता है. रेखा जी भी इससे अछूती नहीं रहीं हैं उन्होंने वर्तमान की राजनीति के चाल चलन पर मुखरता से दोहों के माध्यम से अपनी बात कही है.

 पुस्तक में राजस्थान की माटी को गर्वित करते  दोहे पढ़कर पाठक स्वयं ही अनुमान लगा देगा की रेखा जी राजस्थान की बेटी हैं.

 कुल मिलाकर यह दोहा संग्रह हर वर्ग के लिए एक उत्तम उपहार है. भाषा की सहजता से आम इंसान भी दोहा रचने के उद्देश्य को भलीभांति समझ सकता है.

 

 रेखा जी के दोहों का भावपक्ष बहुत ही प्रबल है, कुछ दोहों में रह गईं अशुद्धियाँ बतातीं हैंकि प्रकाशन के पूर्व जिस सावधानी की आवश्यकता थी वह नहीं रही है किन्तु लगभग सभी दोहे शिल्प पर भी खरे हैं. मैं रेखा लोढ़ा ‘स्मित’ जी को इस संग्रह के प्रकाशित होने पर बहुत बधाई देता हूँ.

 

 कुछ दोहे इस संग्रह के साझा कर रहा हूँ.

 

ढूँढ़ा सारे विश्व में, जीने का आधार |

ढ़ाई आखर में मिला, इस जीवन का सार ||

 

दोष देखना और के, होता है आसान |

भीतर अपने झाँकिये, है दोषों की खान ||

 

गुरु चरणों में हम नमन, करते हैं शत बार |

शुभाशीष गुरु का फले, तब होता उद्धार ||

 

राम नाम पतवार से, हो जाता भव पार |

राम नाम अवलम्ब है, प्रभु जीवन आधार ||

 

हरियाली खोने लगी, लुप्त हुई जलधार |

बोलूँ या मैं चुप रहूँ, कोयल करे विचार ||

 

राजनीति के नाम पर, बस होते षडयंत्र |

हर मनके पर जप रहे, मात्र स्वार्थ का मन्त्र ||

 

सूर्य सरीखा शौर्य है, सतरंगी है शान |

धरती राजस्थान की, हीरों वाली खान ||

 

पंख पसारे थे अभी, छूने को आकाश |

लगे बाँधने फिर मुझे, ये रिश्तों के पाश ||

 

 

समीक्षक : अशोक कुमार रक्ताले,

54, राजस्व कॉलोनी, फ्रीगंज, उज्जैन ४५६०१०.(म.प्र.)

मोबाइल : 09827256343

 

Views: 97

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Jitendra sharma posted a blog post

लौट के आये उड़ान से - ग़ज़ल

दिन-भर जो बात करते रहे आस्मान सेसूरज ढला तो लौट के आये उड़ान सेथा वक़्त का ख़याल या हारे थकान सेनिकले…See More
12 minutes ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') added a discussion to the group English Literature
Thumbnail

Arms and ammunition (Poem)

 Guns and swordsSymbol of braveryUsed by soldiersFor country's victoryGuns and swordsSymbol of…See More
12 minutes ago
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सत्यनारायण सिंह जी चित्रानुरूप सन्देश परक बेहतरीन दोहे के लिए हार्दिक बधाई"
1 hour ago
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश जी सादर अभिवादन चित्रानुरूप बहुत ही सुंदर दोहे सटीक भाव बहुत बहुत बधाई"
1 hour ago
Jitendra sharma commented on Jitendra sharma's blog post लौट के आये उड़ान से - ग़ज़ल
"जी बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर साहब।"
2 hours ago
Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"भरी बालटी दूध की, पकड  करे  शिशु  पान।मुख मंडल पर मात के, खिली देख…"
7 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"दोहावली [ प्रथम प्रस्तुति] ............................. मातु व्यस्त हैं काम में, कौन पिलाये दुग्ध।…"
7 hours ago
Bishwajit yadav updated their profile
9 hours ago
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post यूँ इश्क का इक सुकून हूँ मैं..
"//कौन * जी ये काफ़िया गलत है । इसपर जानकारी चाहिए थी // इस पर क्या जानकारी चाहिए? //क्या किसी शब्द…"
10 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल-किनारा हूँ तेरा तू इक नदी है
"आद0 सतविंद्र कुमार राणा जी सादर अभिवादन। बहुत बहुत आभार आपका"
10 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल-किनारा हूँ तेरा तू इक नदी है
"आद0 दिगंबर नासवा जी सादर अभिवादन। आभार आपका"
10 hours ago
rakesh gupta shared their blog post on Facebook
13 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service