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जड़ दिहला हो, रामा ! जड़ दिहला

सगरौ देहियाँ पे गाढ़ा चुंबन, जड़ दिहला |

 

हथवौ से जड़िला, नजरियौ से जड़िला

बहियाँ में लइके अँकवरियौ से जड़िला

अंगै-अंग होंठवा मुहर किहला |

 

उरौ पे जड़िला, उर-फुलवौ पे जड़िला

अँगुरियन कै टोहवा कुछ नहिं छोड़िला

पोरै-पोर रसवा भर दिहला |

 

हियवा कै छपवा हियरवा में उतरल

मनुआँ कै हिरना चेहरवा पे उछरल

सेजिया इंद्र-धनुसवा कर दिहला |

 

रामै कै देह, रामै तोहरा चुंबन

रामहि बरनवा, राम-रसरी में दुइ तन

सौ-सौ जनमवा रामा ! हर लिहला |

 

(मौलिक व अप्रकाशित)

-- संतलाल करुण  

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Replies to This Discussion

सुफ़ियाना अंदाज़ में निकहे गीत रचना भइल बा आदरणीय.  एह सुन्नर रचना खातिर अनघा बधाई आ शुभकामना.. 

सादर

आदरणीय पाण्डेय जी, हमनी के भोजपुरी नहिखे आवल बा | प्रयास किह्लीं हई | अ इही कारन इह्मे अवधी केर पुट जबरिया घुस गइल बा | लकिनआप केर बधाई अउर सुभजामना से कोसिसिया को बहुतै ताकत मिलल बा, बहुतै आभार !

आदरणीय सन्तलाल करुन जी, रउआ भोजपुरी भासा के ना हईं, बाकिर, राउर रचना प्रयास आ भासा खातिर उछाह मन मोह रहल बा.

आदरणीय, अइसहीं नेह-छोह बनल रहो.

सादर

आदरणीय पाण्डेय जी, आप की सद्बावाना से हृदय गद्गद हुआ, सहृदय आभार !

बहुत ही सुन्दर ,  हार्दिक बधाई आपको …………..

आदरणीय वर्मा जी,

उत्प्रेरक उद्गार के लिए हार्दिक आभार !

वाह! गीत सुन (पढ़) के ता रोम-रोम झूम गईल एकदम से..
बहुत-बहुत बधाई रउवा के एह रचना खाति..।।

आदरणीय जयनित जी,

आप ने रचना मन से पढी और हृदय से पसंद की, बहुत-बहुत धन्यवाद !

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