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भोजपुरी साहित्य Discussions (248)

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डॉ. गोरख प्रसाद मस्ताना जी के एगो भोजपुरी ग़ज़ल

  कंक्रीट के शहर में पत्थर हो गइल अदमी   दिल का ह दिमागों से बंजर हो गइल अदमी     रोपाया के बिछौना पर सोना के रहीत चादर बस एही हाव हाव में…

Started by Santosh Kumar

2 Feb 2, 2011
Reply by Santosh Kumar

मुख्य प्रबंधक

"OBO लाइव विश्व भोजपुरी कवि सम्मेलन" आपन सुझाव दिही सभे....

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सभे साथी लोगन के बागी के परनाम, आपन भोजपुरी साहित्य समूह मे हम एगो अनूठा अउर अंतरजाल पर पहिलका लाइव विश्व भोजपुर…

Started by Er. Ganesh Jee "Bagi"

16 Jan 31, 2011
Reply by Navin C. Chaturvedi

शिवपूजन लाल विधार्थी के एगो ग़ज़ल

  अब दिनों अन्हार लागत  बा हर साँस दुस्वार लागत  बा   नाव कइसे पार लागी जब साहिले मझधार लागत  बा   आज ढाकल मोसकिल बाटे आँचर तार- तार लागत  …

Started by Santosh Kumar

0 Jan 31, 2011

नूर मुहम्मद नूर जी के एगो ग़ज़ल

युवा स्वर : नूर मुहम्मद नूर जी के एगो ग़ज़ल  पानी    पागल बना रहल बा पानी जरा  रहल बा   पानी उठा रहल बा पानी गिरा रहल बा   औंधी तलक से भींज…

Started by Santosh Kumar

0 Jan 31, 2011

तोहरे से हम प्यार करेनी ,

M , तोहरे से हम प्यार करेनी , तोहे जिया में बसाइब हो , तू हमर हाउ हमरे रहबू , ना त अगिया लगाइब हो , F, हम तोहर जागीर ना हाई , हम इ तोहसे बत…

Started by Rash Bihari Ravi

3 Jan 17, 2011
Reply by Rash Bihari Ravi

"बस तोहरे खातिर"

लिखत बानी कविता बस तोहरे खातिर,दिवाना भइनी त बस तोहरे खातिर,केहु के ना देखी अब ई नजर,नजर तरसी भी त बस तोहरे खातिर, हर साँस के साथ करेम याद…

Started by Raju

2 Jan 17, 2011
Reply by Raju

प्रीत के रीत निभईह सजना ,(Directed by OBO Member Mr. Abhishek Tiwari)

फिल्म का नाम- प्रीत के रीत निभईह सजना ,निर्माता- स्पेड मीडिया ऐंड इंटरटेनमेंट ,निर्देशक- अभिषेक तिवारी(OBO Member)  सह निर्देशक- सुनील गुप्…

Started by PREETAM TIWARY(PREET)

1 Jan 17, 2011
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

उलझन

मिलेलऽ जब तु होठ सट जाला अइसेरात के अधखिलल फूल हो जइसे,चाह के भी  ना हिल पावेला ईतोहसे हम कुछ कही कइसे,पल-पल झपकत रहेला पलक हमारईशारा से भी…

Started by Raju

1 Jan 17, 2011
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

तोहरा बिना पिया हो दुनिया बेकार बा ,

तोहरा बिना पिया हो दुनिया बेकार बा , आजा तू परदेसी जे हमारा से प्यार बा , फागुन बितल रंग ना चढ़ल हमरा ऊपर , लागत बा की रंगवा के तोहरे इंतजा…

Started by Rash Bihari Ravi

2 Jan 15, 2011
Reply by Rash Bihari Ravi

सोची ले ,

सोची ले , इ सभ बात के जीवन में उतार ली , जवना के वजह से , राम पुरुषोतम भाईले , हरिश्चंद उत्तम भाईले , परसुराम के जवान ताकत बनल , धर्मराज जव…

Started by Rash Bihari Ravi

4 Dec 31, 2010
Reply by Santosh Kumar

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२२१/२१२१/१२२१/२१२***पीछे गयी  है  छूट  जो  होली  गुलाल की साजिश है इसमें देख सियासी कपाल की।१। *…See More
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