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भोजपुरी साहित्य Discussions (249)

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अरे बाप रे बाप इ जिए ना दी कादून ,

अरे बाप रे बाप इ जिए ना दी कादून , दमवा बढावले बाटे फिरू इ बढाई , हमनी गरिबवान के आसू ना दिखाई , इ ता बरका लोग से मॉल पुआ खाई , अबकिर भोटवा…

Started by Rash Bihari Ravi

2 Jul 19, 2010
Reply by Saurabh Pandey

अउर ए बंद से महँगाई घटि गइल...हा..हा..हा..हा

केतना खुसी के बाति बा की काल्ह की बंद से महँगाई घटि गइल. हाँ भाई...काँहें हँसतानि..घटल नइखे का? खैर हो सकेला रउरा खातिर ना घटल होखे पर ए बं…

Started by Prabhakar Pandey

2 Jul 8, 2010
Reply by Rash Bihari Ravi

राजा ठाकुर

इ कहानी हा एगो अइसन नोवजवान के जवान नाम कमाए खातिर हमेशा पागलपन करत रहेला , हमरा पंचायत में 7 गो गाँव बा जवना में 52 गो टोला पंचायत के मुखि…

Started by Rash Bihari Ravi

3 Jun 5, 2010
Reply by PREETAM TIWARY(PREET)

हमके अइसन मिलली रानी उहो खूब नचावत बारी,

दुख बाटे बाकिर खुसी होला रउआ के बतावत बानी, हमके अइसन मीलली रानी उहो खूब नचावत बारी, माई के हमरो पाव न दबाइहान इ हमसे कहत बारी , जईहान उहो…

Started by Rash Bihari Ravi

2 May 28, 2010
Reply by PREETAM TIWARY(PREET)

गुरु जी के समझ से ,

गुरु जी के समझ से , लाल कृष्ण अडवानी ------- सपनो का राज कुमार , मनमोहन सिंह ------- भाग्य के साढ़, सिबू शोरेन ------- मैं ऐसा ही हु , ममता…

Started by Rash Bihari Ravi

1 May 24, 2010
Reply by PREETAM TIWARY(PREET)

हमके बेसरम कर देला तोहर एगो बात ,

हमके बेसरम कर देला तोहर एगो बात , ओहदिने बोलब जहिया तोहर थमाब हाथ , हमके बेसरम कर देला तोहर एगो बात , तोहर पहिरावा तोहके अच्छा लागेला , बाक…

Started by Rash Bihari Ravi

2 May 15, 2010
Reply by Ratnesh Raman Pathak

जहर भरल बा जवना मन में ,

जहर भरल बा जवना मन में , उ अमृतमय बानी का बोली , जे दोसरा में चोट पहुचावत बा , हम ओकरा मन के का बोली , देश के खातिर लड़त रही , उ कबो लड़ाई…

Started by Rash Bihari Ravi

1 May 13, 2010
Reply by Admin

मुख्य प्रबंधक

भोजपुरिया रिति रिवाज - माई के पूजईया ( चिकेन पाक्स )

भोजपुरिया समाज मे एगो बहुत पुरान आ पारम्परिक रिति रिवाज बा "माई के पुजईया" ,आज हम उहे रिति रिवाज के वर्णन करे के प्रयास करत बानी ... जब हम…

Started by Er. Ganesh Jee "Bagi"

2 May 7, 2010
Reply by Rash Bihari Ravi

कविता लिखत बानी कविता के जरुरत बा ,

कविता लिखत बानी कविता के जरुरत बा , न सार के जरुरत बा न बिचार के जरुरत बा , कविता लिखत बानी कविता के जरुरत बा , सोच होखे समझ होखे एपर केहू…

Started by Rash Bihari Ravi

2 May 3, 2010
Reply by Rash Bihari Ravi

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Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
6 hours ago

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Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Saturday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
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"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
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Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
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Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
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Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

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Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

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Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10

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