For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

महा प्रभु वल्लभाचार्य का कथन है – जीवाः स्वभावन्तो दुष्टाः , अर्थात जीव स्वभाव से ही दुष्ट प्रकृति का होता है दोषपूर्ण प्रवृत्तियों के कारण वह तमाम अन्य गलतियाँ करता है , नियमों के विरुद्ध , संस्कारों के विपरीत कार्य करता है । इसी संबंध मे गोस्वामी तुलसी दास जी का कथन है :-

                     भूमि परत भा ढाबर पानी । जनु जीवहि माया लपटानी ॥

जीव वैसे तो परमात्मा का अंश होने के कारण शुद्ध बुद्ध चैतन्य है किन्तु धरती पर जन्म लेने के पश्चात माया उस जीव को अपने मे समेट लेती है , यह जाल नाना प्रकार के दोष युक्त है जैसे काम, क्रोध, मद , मोह , दम्भ इत्यादि । गोस्वामी जी ने अपनी बात को बादल से गिरने वाली बूंद के बिम्ब द्वारा समझाया कि जैसे भूमि के स्पर्श से पहले बूंद पवित्र और स्वच्छ है परंतु धरती पर गिरते ही वह अस्वच्छ हो गई दोषयुक्त हो गई । मनोविज्ञान और मानव शास्त्र दोनों ही इन दोषों को जीवन की मूल प्रवृत्ति कहते है । हालांकि भिन्न भिन्न मनोवैज्ञानिकों ने मूल प्रवृत्तियों की संख्या और पहचान भिन्न भिन्न रूपों मे की है । विदेशी मनोवैज्ञानिक फ्रायड ने तो सेक्स प्रवृत्ति पर इतना ज़ोर दिया कि मनुष्य के सभी चेतन और अचेतन व्यवहार के मूल मे वह उसी को निर्णायक मानता है , परंतु अन्य मानवशास्त्रियों और मनोवैज्ञनिकों ने भूख , काम , प्रभुत्व कामना , भाय , गौरव , लोभ , आराम और जिज्ञासा को मनुष्य की मूल प्रवृत्त माना है । भूख, नींद, डर , काम जैसी वृत्तियों मे  मनुष्य और जानवरों की प्रवृत्तियाँ एक जैसी ही है , या शायद उससे भी अधिक आक्रामक और विध्वंसक ।

विचार करने वाली बात ये है कि इतने दोषों  से भरे इस मनुष्य देह को गोस्वामी जी  ने – साधन धाम , विबुध दुर्लभ तनु कहा है ।

ऐसी क्या विशेषता इस मनुष्य शरीर मे है जो इसे इतने विकारों के बावजूद सबसे बड़ा कहा गया है ? इस संबंध मे नीति वाक्य उत्तर देता है – धर्मो हि तेषामधिको विशेषो धर्मेण हीनाः पशुभिः समानाः ।

अर्थात – वह विशेषता है धर्म , धर्म से विहीन मानव पशु के समान है ।

यहाँ मुश्किल बात ये है कि धर्म को आजकल अङ्ग्रेज़ी के रिलीजन शब्द के अर्थों मे खो गया है।...................

क्रमशः

 

 

अप्रकाशित एवं मौलिक

Views: 655

Replies to This Discussion

सादर नमस्कार आदरणीया!
'जीव' यहां पर है क्या-शरीर या आत्मा?
क्षमा करें महोदया 'स्वभाव से ही दुष्ट' और 'संसर्ग में आकर परिवर्तित होना' एक ही बात है क्या? मनोविज्ञान अथवा अध्यात्म का ज्ञान तो मुझे नहीं पर मुझे लगता है आदरेया 'माया'/दोष और 'मूलप्रवृत्तियां' एक ही श्रेणी में नहीं रखना चाहिए! अर्जित प्रवृत्तियां भी तो होती हैं शायद कुछ,वह 'माया' जैसी लगती हैं।
मूलप्रवृत्तियों को पूर्णतय: दोषयुक्त मानना कैसे उचित है,क्योंकि इन्ही प्रवृत्तियों को सही दिशा देने पर कई बार हम सकारात्मकता/उत्कृष्टता की ओर अग्रसित होते हैं।पशुओं में इन प्रवृत्तियों को 'सही दिशा देने की क्षमता' नहीं होती है।
दूसरी बात आदरणीया कुछ दिन पहले इसी मंच/समूह पर 'Are Religion or Dharma same' मैंने पढ़ा था,मेरा विनम्र निवेदन है,उस आलेख का अवलोकन करते हुए अन्तिम पंक्तियां कुछ और स्पष्ट कर दें,जिससे गहन लेख को सम्पूर्णता प्राप्त हो सके।
मननशील विचार प्रस्तुत करने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद!
सादर

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to मिथिलेश वामनकर's discussion ओबीओ मासिक साहित्यिक संगोष्ठी सम्पन्न: 25 मई-2024
"इस सफ़ल आयोजन हेतु बहुत बहुत बधाई। ओबीओ ज़िंदाबाद!"
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh replied to मिथिलेश वामनकर's discussion ओबीओ मासिक साहित्यिक संगोष्ठी सम्पन्न: 25 मई-2024
"बहुत सुंदर अभी मन में इच्छा जन्मी कि ओबीओ की ऑनलाइन संगोष्ठी भी कर सकते हैं मासिक ईश्वर…"
yesterday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर posted a discussion

ओबीओ मासिक साहित्यिक संगोष्ठी सम्पन्न: 25 मई-2024

ओबीओ भोपाल इकाई की मासिक साहित्यिक संगोष्ठी, दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय, शिवाजी…See More
Sunday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"आदरणीय जयनित जी बहुत शुक्रिया आपका ,जी ज़रूर सादर"
Saturday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"आदरणीय संजय जी बहुत शुक्रिया आपका सादर"
Saturday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"आदरणीय दिनेश जी नमस्कार अच्छी ग़ज़ल कही आपने बधाई स्वीकार कीजिये गुणीजनों की टिप्पणियों से जानकारी…"
Saturday
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"बहुत बहुत शुक्रिया आ सुकून मिला अब जाकर सादर 🙏"
Saturday
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"ठीक है "
Saturday
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"शुक्रिया आ सादर हम जिसे अपना लहू लख़्त-ए-जिगर कहते थे सबसे पहले तो उसी हाथ में खंज़र निकला …"
Saturday
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"लख़्त ए जिगर अपने बच्चे के लिए इस्तेमाल किया जाता है  यहाँ सनम शब्द हटा दें "
Saturday
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"वैशाख अप्रैल में आता है उसके बाद ज्येष्ठ या जेठ का महीना जो और भी गर्म होता है  पहले …"
Saturday
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"सहृदय शुक्रिया आ ग़ज़ल और बेहतर करने में योगदान देने के लिए आ कुछ सुधार किये हैं गौर फ़रमाएं- मेरी…"
Saturday

© 2024   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service