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आध्यात्मिक चिंतन Discussions (75)

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PAIN .. PRAYER.. AND GRATITUDE … a perspective

                              PAIN .. PRAYER.. AND  GRATITUDE … a perspective   So true. .... sometimes  people come close to you, nay, v…

Started by vijay nikore

2 Oct 4, 2018
Reply by vijay nikore

TIME "IS" and TIME is "NOT"

Time "IS" and Time is "NOT.... this is the greatest philosophic discovery by our sages as well as by scientists like Einstein. Given the…

Started by vijay nikore

0 Oct 4, 2018

गति और प्रगति

197 गति और प्रगतिकहा जाता है कि यह व्यक्त जगत देश, काल और पात्र (अर्थात् टाइम, स्पेस और पर्सन) के अनुसार गतिशील है। अव्यक्त स्थिति में देश,…

Started by Dr T R Sukul

0 Jun 7, 2018

DEVOTION ... HERE AND NOW

                                    An event in life can be life changing. It can steer us towards devotion for God. On the other hand, de…

Started by vijay nikore

1 Sep 2, 2016
Reply by KALPANA BHATT ('रौनक़')

PROVIDENTIAL UNDERSTANDING

PROVIDENTIAL  UNDERSTANDING Thoughts .. Pure and shimmering Their eloquence rising and uplifting Subtly pervading even subtlety Like air,…

Started by vijay nikore

2 Sep 2, 2016
Reply by vijay nikore

वर्तमान हिन्दू समाज में जातिगत विभीषिका को किस तरह समाप्त किया जासकता है?

वर्तमान हिन्दू समाज में जातिगत विभीषिका को किस तरह समाप्त किया जासकता है?  क्या इस जातिगत भेद-भाव का धार्मिक आधार मनगढ़ंत है? क्या वर्तमान…

Started by SudhenduOjha

5 Aug 21, 2016
Reply by SudhenduOjha

प्रशंसा की चाह: मानसिक बीमारी

प्रशंसा की चाह: मानसिक बीमारी ==================== अपनी प्रशंसा और उसके प्रसार में क्यों लगे रहना चाहिये, किसके लिये अपनी प्रशंसा? ये हरकते…

Started by Dr T R Sukul

0 Aug 12, 2016

विभिन्न धर्मों की उत्पत्ति का कारण

विभिन्न धर्मों की उत्पत्ति का कारण ==================== मानव की जन्मजात भय-मनोविज्ञान ही विभिन्न धर्मों के उद्गम का श्रोत है। विभिन्न प्राक…

Started by Dr T R Sukul

0 Jul 27, 2016

नाम पर झगड़ा

नाम पर झगड़ा ========== यह समस्त ब्रह्माॅंड एक ही परम सत्ता की कल्पना का विस्तार है लेकिन अनेक लोग उसे अलग अलग नाम देकर अपने पसंद के नाम को…

Started by Dr T R Sukul

0 Jun 27, 2016

भगवान

भगवान ====== आजकल हमारे समाज में बिना किसी मापदंड के किसी को भी भगवान कहा जाने लगता है! भारतवर्ष में अनेक लोग अपने को भगवान कहलाना पसंद करत…

Started by Dr T R Sukul

0 Jun 14, 2016

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Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"गज़ल  गली में महशर सा नज़ारा लगता है ।हर कोई दिलबर का मारा लगता है । ओज पे मेरे इश्क का…"
2 hours ago
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीय पंकज कुमार मिश्रा जी मुशायरे का आगाज करने के लिए बहुत-बहुत बधाइयां"
5 hours ago
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीय गुलशन खैराबादी जी अच्छी ग़ज़ल हुई बहुत-बहुत बधाइयां झील सी तेरी आँख में चेहरा लगता है।जब भी…"
5 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"जी शुभ रात्रि"
5 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"स्वागत है"
5 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"टिप्पणी सुब्ह दूँगा प्रिय ।"
5 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीय अमित जी बहुत खूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई"
5 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"अभी अभी लिखे हूँ ग़ज़ल, बहुत दिनों से भागीदारी नही हो पा रही थी इस लिए बहुत जल्दबाज़ी हुई है।"
5 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीय बाऊजी प्रणाम सहीह कर दिए हूँ"
5 hours ago
ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"गुलशन खैराबादी झील सी तेरी आँख में चेहरा लगता है। जब भी देखा मुझको अपना लगता है।। जो तुमको ये…"
5 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"इसे एडिट करें और सहीह लिखें, अभी 15 मिनट का समय है ।"
5 hours ago
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"कुछ कुछ झूठा कुछ कुछ सच्चा लगता है। फिर भी मुझको तू ही अच्छा लगता है।।१।। बातें करना मिलना-जुलना…"
5 hours ago

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