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Er Kumar Nusrat
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रामबली गुप्ता commented on Er Kumar Nusrat's blog post गज़ल - बेटों से कहीं ज्यादा मैं बेटी की तरफ हूं
"वाह भाई नुसरत जी वाह, क्या ग़ज़ल कही है। हर शैर उम्दा हुआ है। आनन्द आया पढ़कर। अव्वल तो हार्दिक बधाई स्वीकारें। कथ्य और शिल्प के सम्बन्ध में गिरिराज भाई जी और नीलेश भाई जी से सहमत हूँ। एक पुनः विचार कर देखिएगा। सादर"
Sep 17, 2017
Er Kumar Nusrat posted a blog post

गज़ल - बेटों से कहीं ज्यादा मैं बेटी की तरफ हूं

सोने की चमक छोड़ के मिट्टी की तरफ हूं बेटों से कहीं ज्यादा मैं बेटी की तरफ हूं तुम लोग तो जालिम के तरफदार हो लेकिन मैं आज भी इस देश में गांधी की तरफ हूं जब साथ दिया मैंने किसी अहले सितम का एहसास हुआ मुझको मैं गलती की तरफ हूं आंखो को मेरी ख्वाब ना दौलत के दिखाओ मैं भूख से बेचैन हूं रोटी की तरफ हूं मैं डूबने दूंगा ना गरीबों का सफीना तूफां के मुकाबिल हूं मैं मांझी की तरफ हूं ये शहर का माहौल मुबारक हो आपको मैं गांव का बाशिंदा हूं बस्ती की तरफ हूं नुसरत मेरी ग़ज़लें भी मोहब्बत से भरी हैं गौतम…See More
Sep 16, 2017
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Er Kumar Nusrat's blog post गज़ल - बेटों से कहीं ज्यादा मैं बेटी की तरफ हूं
"वाह वाह बहुत शानदार ग़ज़ल कही है आदरणीय..बधाई"
Sep 16, 2017
Afroz 'sahr' commented on Er Kumar Nusrat's blog post गज़ल - बेटों से कहीं ज्यादा मैं बेटी की तरफ हूं
"आदरणीय नुसरत जी ग़ज़लके लिए आपको बधाई!आदरणीय निलेश जी का सुझाव क़ाबिल ए ग़ौर है! में आदरणीय की बात से सहमत हूँ! सादर"
Sep 16, 2017

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" commented on Er Kumar Nusrat's blog post गज़ल - बेटों से कहीं ज्यादा मैं बेटी की तरफ हूं
"आ. कुमार जी आपकी ग़ज़ल पर समर कबीर साहब, आ. गिरिराज जी और आ. निलेश शेवगाँकर जी अपनी बात कह ही चुके हैं गौर कीजिएगा। मेरी तरफ से आपको बधाई"
Sep 16, 2017
Nilesh Shevgaonkar commented on Er Kumar Nusrat's blog post गज़ल - बेटों से कहीं ज्यादा मैं बेटी की तरफ हूं
"आ. कुमार जी,मच पर आपको पहली बार पढ़ा है... अच्छा लगा.. ग़ज़ल  भावपूर्ण है.मतले में सानी में... में को मैं कर लें .ये शहर का माहौल मुबारक हो आपको..यह मिसरा आख़िर में थोडा मोच खाया है...बहर चूक रहा है ..अंतिम रुक्न 122 आना चाहिए 212 हो गया है…"
Sep 16, 2017

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Er Kumar Nusrat's blog post गज़ल - बेटों से कहीं ज्यादा मैं बेटी की तरफ हूं
"आ. कुमार नुसरत भाई , खूब सूरत ग़ज़ल के लिये बधाइयाँ । एक बात कहना चाहता हूँ , आवश्यक नही कि आप सहमत हों , विचार अपने होते हैं .. उअला और सानी पर विचार करने से  , मतले मे क्या ऐसा नही लगता ..कि ..  अनजाने मे ही सही , बेटी की तुलना मिट्टी से…"
Sep 16, 2017
Er Kumar Nusrat commented on Er Kumar Nusrat's blog post गज़ल - बेटों से कहीं ज्यादा मैं बेटी की तरफ हूं
"आप सभी का बहुत बहुत आभार"
Sep 15, 2017
पंकजोम " प्रेम " commented on Er Kumar Nusrat's blog post गज़ल - बेटों से कहीं ज्यादा मैं बेटी की तरफ हूं
"वाह उम्दा ग़ज़ल भाई जी वाह"
Sep 15, 2017

Profile Information

Gender
Male
City State
Narnaul Haryana
Native Place
Narnaul
Profession
Ghazalkaar
About me
Engineer

Er Kumar Nusrat's Blog

गज़ल - बेटों से कहीं ज्यादा मैं बेटी की तरफ हूं

सोने की चमक छोड़ के मिट्टी की तरफ हूं

बेटों से कहीं ज्यादा मैं बेटी की तरफ हूं



तुम लोग तो जालिम के तरफदार हो लेकिन

मैं आज भी इस देश में गांधी की तरफ हूं



जब साथ दिया मैंने किसी अहले सितम का

एहसास हुआ मुझको मैं गलती की तरफ हूं



आंखो को मेरी ख्वाब ना दौलत के दिखाओ

मैं भूख से बेचैन हूं रोटी की तरफ हूं



मैं डूबने दूंगा ना गरीबों का सफीना

तूफां के मुकाबिल हूं मैं मांझी की तरफ हूं



ये शहर का माहौल मुबारक हो आपको

मैं…

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Posted on September 13, 2017 at 11:00am — 13 Comments

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At 5:32pm on November 22, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

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