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जयति जैन "नूतन"'s Blog (5)

निशब्द संसार

तुम शब्द हो

और मैं अर्थ

तुम हो तो मैं हुं

शब्द बिन अर्थ बेकार

निशब्द संसार

 

तुम प्रीत हो

और मैं जोगन…

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Added by जयति जैन "नूतन" on December 1, 2017 at 7:30pm — 3 Comments

कमाल की बात है

बुजुर्गों को सत्ता और युवाओ को बेरोजगार बनाया है,
कमाल है इतने सालों में क्या देश हमने बनाया है ! 
टेक्स हमने भरे सारे, नेताओं ने जमकर मौज उडाया है,
कमाल की बात है कि हमने अब तक इन्साफ नहीं पाया है !
घोटालों पर घोटाले होते रहे और हम खुली आंखों सोते रहे,
कमाल की बात है कानून के नाम पर क्या बेवकूफ़ बनाया है !
शिक्षित लोग, विकसित देश का सपना लिये फ़िर रहे हैं हम,
कमाल की बात है ऊचे पद पर अनपढो को बैठाया है…
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Added by जयति जैन "नूतन" on November 26, 2017 at 2:30pm — 2 Comments

कविता- जी एस टी

कविता- जी एस टी
 
मैं सो रही थी मुझे उठाया गया,
नींद में ही गाडी में बैठाया गया !
होश में आती उससे पहले ही बताया गया, 
व्यापारियों का खून चूसने जीएसटी लगाया गया !
 
अधिकारी के दफ़्तर संग लाया गया,
टेक्स का सारा…
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Added by जयति जैन "नूतन" on October 27, 2017 at 11:39pm — 1 Comment

कविता: जो खुद को सेकुलर नहीं मानते उनके लिए

बाहर हैं तो अभी सीधा घर जाइये

घर जाकर टी.वी. में आग लगाइये

सभी जाति -धर्म के लोग दिखाई देगें

फिल्म - सीरियल पर नजर दौड़ाइये

बच्चों को उस स्कूल में डालिये

जहां आपकी जाति के शिक्षक होने चाहिये

सामान हर दुकान से मत खरीदिये

दुकान भी आपकी जाति धर्म की होनी चाहिए

किस धर्म के आदमी ने बनाया है ये सामान ?

अपनी जाति के दुकानदार से पुछवाईये

आप सेकुलर नहीं जो किसी के भी हाथ का खालें

इसलिए कुछ दिन…

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Added by जयति जैन "नूतन" on October 23, 2017 at 11:00pm — 9 Comments

कविता ---- एक दूजे का साथ ------

इतने साल बीत गये 

ना वो बदली जरा ना मैं !

आज भी उसे नहीं पसंद

मेरा किसी और से बात करना !

मुझे भी आजतक नहीं भाया

उसका किसी को देख मुस्काना !

उसे अच्छा नहीं लगता जब

मेरा ध्यान उससे हट जाना !

मुझे पसंद नहीं आता उसका

मुझे छोड़ टी.वी. तक देखना !

वो कहती है सुनो प्रिय 

मैं सामने हुं तो मुझे ही देखो !

मुझे भाता है उसे चिडाना

दूसरों को देख देख मुस्काना !

उसे पसंद तक नहीं मेरा चश्मा

मेरी आंखों पर हमेशा रहता…

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Added by जयति जैन "नूतन" on October 5, 2017 at 4:00pm — 5 Comments

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