For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कविता ---- एक दूजे का साथ ------

इतने साल बीत गये 

ना वो बदली जरा ना मैं !
आज भी उसे नहीं पसंद
मेरा किसी और से बात करना !

मुझे भी आजतक नहीं भाया
उसका किसी को देख मुस्काना !

उसे अच्छा नहीं लगता जब
मेरा ध्यान उससे हट जाना !

मुझे पसंद नहीं आता उसका
मुझे छोड़ टी.वी. तक देखना !
वो कहती है सुनो प्रिय 
मैं सामने हुं तो मुझे ही देखो !

मुझे भाता है उसे चिडाना
दूसरों को देख देख मुस्काना !

उसे पसंद तक नहीं मेरा चश्मा
मेरी आंखों पर हमेशा रहता !

चश्मा लगाकर सामने मत आना
चश्मा देख उसका चिड-चिडाना !

सामने है वो और मोबाईल हाथ 

देखते ही उसका गुस्से से भर जाना ! 

मेरे पास हो तो मेरे साथ भी रहो 

कह कर उसका उदास हो जाना ! 

किसी और की बात क्या करना 

बाकी है अभी एक दूजे को समझना ! 

हमे आज तक नहीं पसंद आया
एक दूजे का किसी और से जुडना !

----------

मौलिक- अप्रकाशित रचना 

जयति जैन (नूतन), रानीपुर झांसी 

Views: 633

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by जयति जैन "नूतन" on October 29, 2017 at 4:16pm

bahut bahut shukriya sabhi gunijano ka

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on October 24, 2017 at 7:41am
आदरणीया नूतन जी आपने इस कविता में हृदय की गहराईयों को छूने का उम्दा प्रयास की है ,इस बेहतरीन सृजन के लिए बहुत बहुत मुबारकबाद
Comment by SALIM RAZA REWA on October 6, 2017 at 9:46pm

मोहतरमा जयति जैन,इस प्रस्तुति पर बधाई 

Comment by Mohammed Arif on October 6, 2017 at 8:30pm
मोहतरमा जयति जैन जी आदाब, कविता का बेहतर प्रयास । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । आपकी यह कविता तो एकदम सपाट बयानी है । बिम्बों और प्रतीकों का तो प्रयोग है ही नहीं । वर्तनीगत कई अशुद्धियाँ भी है ।
Comment by Samar kabeer on October 5, 2017 at 5:31pm
मोहतरमा जयति जैन(नूतन)जी आदाब,पहली बार आपकी रचना पढ़ने का अवसर मिला है ।
बहुत अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
17 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
yesterday
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
yesterday
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
Thursday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service