For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कविता: जो खुद को सेकुलर नहीं मानते उनके लिए

बाहर हैं तो अभी सीधा घर जाइये

घर जाकर टी.वी. में आग लगाइये

सभी जाति -धर्म के लोग दिखाई देगें

फिल्म - सीरियल पर नजर दौड़ाइये

बच्चों को उस स्कूल में डालिये

जहां आपकी जाति के शिक्षक होने चाहिये

सामान हर दुकान से मत खरीदिये

दुकान भी आपकी जाति धर्म की होनी चाहिए

किस धर्म के आदमी ने बनाया है ये सामान ?

अपनी जाति के दुकानदार से पुछवाईये

आप सेकुलर नहीं जो किसी के भी हाथ का खालें

इसलिए कुछ दिन हो सके तो भूंखे ही सो जाइये

कपडा - लत्ता और मकान बनवाना हो यदि

अपनी जाति के सभी कारीगर ढूंढ लाइये

माँ बाप बीमार हो तो किसी के भी यहाँ मत जाइये

अपनी जाति का डॉक्टर ढूंढ इलाज़ करवाइये

ना मिले आपकी जाति - धर्म का डॉक्टर -वैध -हकीम

तो माँ -बाप को मरने के लिए यूँ ही घर बैठाइये

राम नाम सत्य बोलिये और बुलवाइये

हम सारे भारतीय सेकुलर ही थे और रहेंगे

दिमाग के इंजन में तेल जरा भरवाइये

सैकड़ो बातें हैं जो आपस में जोड़ती हैं

जाति - धर्म छोड़ सभी मानवता अपनाइये

सबसे मिलना , सभी संग चलना पहचान हो

मैं सेकुलर हूँ इस बात पर गुरूर होना चाहिये !

-----------------

मौलिक- अप्रकाशित रचना 

जयति जैन "नूतन" , रानीपुर झांसी उ.प्र.

Views: 693

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by जयति जैन "नूतन" on October 27, 2017 at 11:18pm

सभी का बहुत बहुत आभार

Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 26, 2017 at 5:05pm

आदरणीय जयति जी व्यंग्य करती हुयी सार्थक रचना के लिए हार्दिक बधाई सादर 

Comment by नाथ सोनांचली on October 25, 2017 at 1:16pm
आद0 जयति जी सादर अभिवादन।बढ़िया व्यंग केसा है आपने। कुछ टंकण त्रुटियों और शिल्प को देख लीजिए। इस प्रस्तुति पर मेरी हार्दिक बधाई।
Comment by Mahendra Kumar on October 25, 2017 at 8:54am

आ. जयति जी, अच्छी लगी आपकी कविता. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. 

1. कविता में सेकुलर शब्द है और शीर्षक में "सेक्युलर".

2. //मैं सेकुलर हूँ इस बात पर गुरूर (या "गर्व"?) होना चाहिये !// देख लीजिएगा.

सादर.

Comment by Samar kabeer on October 24, 2017 at 7:05pm
मोहतरमा जयति जी आदाब,बहुत सुंदर कविता है, आपने भरपूर तंज़ किये हैं उन लोगों पर जो ऐसी सोच रखते हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें,और शिल्प पर अपनी पकड़ थोड़ी मज़बूत कीजिये,टंकण त्रुटियों पर भी ध्यान दीजिए ।
Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on October 24, 2017 at 6:30pm
आदरणीया नूतन जी सरल भाव भंगिमा पर इतनी अच्छी रचना कम देखने को मिलती है ,आपकी लेखनी में जबरदस्त धार है,आपकी लेखनी को शत शत बार नमस्कार है
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on October 24, 2017 at 3:48pm

आदरणीया जयति जी , पहले तो आपका ओपन बुक्स ऑनलाइन पर हार्दिक स्वागत हैं | आपकी रचना पहली बार पढ़ रहीं हूँ , बहुत ही गंभीर विषय और अलग ही विषय पर आपने लिखा है , जिसके लिए हार्दिक बधाई | शुभकामनाये आपको |

Comment by Nilesh Shevgaonkar on October 24, 2017 at 12:52pm

आ. जयती जी,
रचना के शिल्प आदि पर मैं टिप्पणी करने में असमर्थ हूँ लेकिन इस  विषय को चुनने और अपने भाव खुल कर रखने के लिए बधाई ..
जो हिन्दू हैं या मुसलमान हैं या किसी और  मज़हब को अपनी पहचान मानते हैं उनका शर्मिंदा होना लाज़िम है ... जो स्वयमं को पहले इंसान मानते हैं वो  सेक्युलर हैं...और इस बात पर गर्व भी करते हैं ..
बधाई 

Comment by Dr. Vijai Shanker on October 24, 2017 at 10:39am
एक कठिन विषय को समझाने का अच्छा प्रयास। बधाई, आदरणीय सुश्री जयति जैन जी , सादर।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Monday
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service