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Rajinder sharma "raina"'s Blog (7)

बर्फ (ग़ज़ल)

हल्की फुलकी ग़ज़ल पेश है दोस्तों



बर्फ दिल में जब जमी होती,

तभी आँखों में नमी होती।



धुँआ उठता जब आग जलती,

हवा चलती कब थमी होती।



फकत मिलते हाथ हाथों से,

दिलों में दूरी बनी होती।



हसीं मौसम देख मत इतरा,

ख़ुशी गम की भी सगी होती।…

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Added by rajinder sharma "raina" on March 22, 2013 at 5:30pm — 2 Comments

ग़ज़ल : जी रहे

दोस्तों देखिये ग़ज़ल का मिजाज 

जी रहे डरते डरते,

थक गये मरते मरते।

बात किस्मत की है,

हम गिरे चढ़ते चढ़ते।

खत्म अक्सर होता है,

आदमी लड़ते लड़ते।

है तमन्ना मरने की,

काम कुछ करते करते। 

झड़ गये इक दिन सारे,

बाल ये झड़ते झड़ते।

जिन्दगी इक पुस्तक है,

याद हो पढ़ते पढ़ते।

डूब जाते सागर में,

हम कभी बढ़ते बढ़ते।

वक्त लग जाता…

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Added by rajinder sharma "raina" on March 21, 2013 at 7:30pm — No Comments

व्यंग्य कविता

इक और व्यंग्य कविता पसंद आई के नही बताना जी 

  इस बस्ती में भेडियें रहते उनको बाहर निकाले कौन,

   सब के घर अब शीशे के है पत्थर क्यों उछाले कौन।

   इकलौते बेटे नें माँ बाप को ही घर से निकाल दिया,

   वृद्धआश्रम में भी गद्दारी है बुजुर्गों को सम्भाले कौन। 

   नामी गुंडे इश्तयारी मुजरिम देखो जेल मंत्री बन बैठे,

   चोरों का जब राज हो गया देखे गा अब तालें कौन। 

   महंगाई पे निरन्तर चढ़े जवानी ऊंचा उंचा कूद रही,

   सारथी जब अनजान हुआ…

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Added by rajinder sharma "raina" on March 18, 2013 at 4:00pm — 1 Comment

व्यंग्य कविता

व्यंग्य कविता मेरी प्यारी 

सच बिकना मुश्किल यारों झूठ के खरीददार बहुत,

इसलिए तो फलफूल रहा है झूठ का व्यापार बहुत।

सच बोलने वालों को तो झट सूली पे लटका देती,

झूठ बोलने वालों का साथ देती अब सरकार बहुत।

सब में चटपटी ख़बरें है मतलब की कोई बात नही,

वैसे तो इस शहर में यारों छपते हैं अख़बार बहुत।

भारत देश के नेता तो गिरगट को भी मात दे देते,

माहिर बड़े परिपक्क हो गए बदलते किरदार बहुत।

मालिक की मर्जी से ही बचता है किसी का…

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Added by rajinder sharma "raina" on March 17, 2013 at 5:30pm — 1 Comment

ग़ज़ल

दोस्तों मेरी किताब की मेरी प्यारी ग़ज़ल, आप को कैसी लगी sunday spacial.................

क्यों खफा हो कुछ बताओ तो सही,

हाल दिल का तुम सुनाओ तो सही।

हम फ़िदा तेरी अदा पे बावफा,

तेरा जलवा अब दिखाओ तो सही।

गर न समझे तो दुखी हो जिन्दगी,

नीर जीवन है बचाओ तो सही।

वो सितारा टूट कर क्यों है गिरा,

राज गहरा ये बताओ तो सही।

सांस लेना चाहते हो गर भली,

पेड़ धरती पे लगाओ…

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Added by rajinder sharma "raina" on March 17, 2013 at 4:30pm — 4 Comments

हास्य व्यंग्य : महिला दिवस

हास्य व्यंग्य



आज के दिन यानि महिला दिवस के दिन,

महिला ने अपने पति की पिटाई,

पति ने थाने में शिकायत लगाई,

थानेदार ने महिला थाने में बुलवाई,

महिला थानेदार को देख घुरराई,…

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Added by rajinder sharma "raina" on March 8, 2013 at 7:00pm — 4 Comments

आज का दौर

दोस्तों देखे ग़ज़ल आप को कैसी लगी ....

आज के इस दौर में इन्सान चिन्तित है बड़ा, 

दरद सहता बेहिसाबा सेज पे भीष्म पड़ा।

तोड़ पिंजरा परिन्दा उड़ भी नही सकता अभी,

क्या करे जाये कहां ये सोच चौराहे खड़ा।

बैर भाई अब यूं करे गौना विभीषन हो गया,

खून के रिश्तें बड़े मतलब बिना है क्या भला।

आग जलती देख कर यूं हाथ सारे सेकते,

हम बुझाये आग क्यों फिर घर जला उसका जला।

इश्क में मतलब जमा शामिल हुआ अन्दाज…

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Added by rajinder sharma "raina" on February 23, 2013 at 4:00pm — 6 Comments

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