For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Sunita dohare's Blog (9)

सिंदूर की लालिमा (अंतिम भाग )...

सिंदूर की लालिमा (अंतिम भाग )........                                         गतांक से आगे.......

मेरा मन सिर्फ मनु को सोचता था हर पल सिर्फ मनु की ख़ुशी देखता था हर घड़ी अन्जान थी मैं उन दर्द की राहों से जिन राहों से मेरा प्यार चलकर मुझ तक आया था ! मेरे लिये तो मनु का प्यार और मेरा मनु पर अटूट विस्वास ही कभी भोर की निद्रा, साँझ का आलस और रात्रि का सूरज, तो कभी एक नायिका का प्रेमी, जो उसे हँसाता है, रिझाता है और इश्क़ फरमाता है, कभी दुनियाभर की समझदारी की बातें कर दुनिया को अपने…

Continue

Added by sunita dohare on May 16, 2015 at 1:30am — 2 Comments

सिन्दूर की लालिमा ( पहला हिस्सा )

मेरी कल्पनाये हर पल सोचतीं है, व्यथित हो विचरतीं हैं

बैचेन हो बदलतीं हैं, दम घुटने तक तेरी बाट जोहती हैं 

लेकिन फिर ना जाने क्यूँ, तुझ तक पहुँच विलीन हो जातीं है

सारी आशाएं पल भर में सिमट के, दूर क्षितिज में समा जातीं है

एक नारी मन की भावनाएं उसकी कल्पनाओं में सजती और संवरती है और उन कपोल कल्पित बातों को एक कवि ही अपनी रचना में व्यक्त कर सकता है मेरे कवी मन ने भी कुछ ऐसा ही लिखने की सोची और फिर शुरू हुई कलम और कल्पना की सुरमई ताल ! लेकिन मन ना लगा तो मैं बाहर निकल आई…

Continue

Added by sunita dohare on May 14, 2015 at 12:30am — 7 Comments

पापा तुम बहुत याद आते हो ...

पापा तुम बहुत याद आते हो ..

समय की बेलगाम रफ़्तार ने 

पापा आपकी छत्रछाया से 

साँसों के प्रवाह से 

आपको मुक्त कर दिया 

दुनिया कहती हैं कि ईश्वर है कहाँ ?

शायद दुनिया पागल हैं 

पर पापा आप ही तो ईश्वर का रूप हो 

मुझसे पूछे ये दुनिया, जब पिता नहीं होते 

तो ईश्वर के नाम से जाने जाते है 

आपके जाने के बाद 

तमाम कोशिशों के बावजूद 

सामने की दीवार पे 

आपकी तस्वीर नहीं लगा…

Continue

Added by sunita dohare on April 29, 2015 at 1:30pm — 14 Comments

बन जाए मेरा भाई सूरज, सज जाए मेरी भी डोली

किरणें चित्र उकेरें अँगना, है प्रीत तेरी हमें बांधन निकली 

धरती का मैं लहंगा सिला लूँ, हरियाली की पहनूं चोली

अम्बर की बन जाए ओढ़नी, देखूं फिर नववर्ष रंगोली

तारों की मैं माला गूंथुं, चाँद बने बिंदिया की रोली

बने चांदनी मेरी मेहँदी, सज जाए मेरी भी हथेली

नेह झड़ी की आस लगाए, सुलगी जाए मरी दूब हठीली

सूरज को मैं बांधू राखी, फिर घोलूं किरणों की शोखी

बन जाए मेरा भाई सूरज, सज जाए मेरी भी डोली..... 

केसर रंग में मांग सजाऊं, देख घटा की अलक…

Continue

Added by sunita dohare on January 26, 2015 at 2:30pm — 14 Comments

हां मैं एक पुरुष हूँ और अगर मैं एक पुरुष हूँ !……..

हां मैं एक पुरुष हूँ और अगर मैं एक पुरुष हूँ !

तो मुझे बनना भी चाहिए उस पुरुष की तरह

जो बेरोजगारी की भेंट चढ़कर, अपने फर्ज़ निभाता रहे,

सुबह से शाम तक रोजी रोटी की जुगाड़ में

जैसे हो कोई जादूगर, जिसके हांथों में हो गरीबी का हुनर

टूटी चप्पलें और घिसते पेंट की मोहरी से, झलके उसकी गरीबी

और ये नाक वाले नेता, छीन सके हम गरीबों के मुंह का निवाला

और कह सकें “तुम मुझे वोट दो मैं तुम्हे नौकरी दूंगा”

जैसे हम गरीब हों बिना पेट के पुतले, पेट हो जैसे मेरा एक…

Continue

Added by sunita dohare on January 1, 2015 at 1:00am — 9 Comments

चाहें पिया का हो घर परदेश में, पीहर तो मेरा है, तेरा घर कृष्णा !!

चाहें पिया का हो घर परदेश में, पीहर तो मेरा है, तेरा घर कृष्णा !!

मोहब्बत का पहला पयाम कृष्णा, उगता हुआ सा जैसे चाँद कृष्णा !

बिन तेरे महफ़िलों में नूर नहीं है, मोहब्बत का तुझे है सलाम कृष्णा !!

सर पे रखा हो जैसे दस्ते खुदा, मंजिल-ए-इश्क है राधेनाम कृष्णा !

मुझे तो नदिया की धार सा लगे, जैसे रिश्तों का घुला जाम कृष्णा !!

मुझे मिल जाए बस तेरी दुआ, तू है सबकी निगाहों का प्यार कृष्णा !

माँ का दुलार, पिता का प्यार सा लगे, मेरे लिए तो भाई का दुलार कृष्णा !!…

Continue

Added by sunita dohare on September 4, 2014 at 7:00pm — 12 Comments

“खुशी जी आपको मेरा सलाम” / एक संस्मरण.........

यही कोई 40 से 45 के बीच की रही होगीं वो गठीला बदन, घने काले बाल थ्री स्टेप में कटे हुए, माथे पर सुर्ख लाल बिंदी उनके चेहरे की खूबसूरती को और भी बढ़ा रही थी हलकी हवा के झोके से उनके बालों की लटकती हुई लट लयमान होकर मानो उनके चेहरे को पूरी तरह से ढकना चाह रही हो उनके एक ओर शून्य में एकटक निहारने की कोशिश जो बरबस उनकी तरफ मुझे आकर्षित कर रही थी  उनके व्यक्तित्व को देखकर कोई भी ये महसूस कर सकता था कि उनके चेहरे पर प्रकति ने स्थाई रूप से मुस्कुराहट और प्यार चिपकाए होंगे लेकिन वक्त के थपेड़ों ने…

Continue

Added by sunita dohare on July 19, 2014 at 5:30pm — 9 Comments

बूढ़े बरगद की आँखें नम हैं

बूढ़े बरगद की आँखें नम हैं

गाँव-गाँव पे हुआ कहर है, होके खंडहर बसा शहर है

बूढा बरगद रोता घूमे, निर्जनता का अजब कहर है

नीम की सिसकी विह्वल देखती, हुआ बेगाना अपनापन है

सूखेपन सी हरियाली में, सुन सूनेपन का खेल अजब है

ऋतुओं के मौसम की रानी, बरखा रिमझिम करे सलामी  

बरगद से पूंछे हैं सखियाँ, मेरा उड़नखटोला गया किधर है

सूखे बम्बा, सूखी नदियाँ, हुई कुएं की लुप्त लहर है

निर्जन बस्ती व्यथित खड़ी है, पहले…

Continue

Added by sunita dohare on July 4, 2014 at 9:00pm — 5 Comments

फिर वही कहानी “नारी व्यथा”....

फिर वही कहानी “नारी व्यथा”

आज फिर सुर्ख़ियों में पढ़कर एक नारी की व्यथा,

व्यथित कर गयी मेरे मन को स्वतः

नारी के दर्द में लिपटे ये शब्द संजीव हो उठे हैं

इस समाज के दम्भी पुरुष

कभी किसी दीवार के पार उतर के निहारना

नारी और पुरुष के रिश्ते की उधडन नजर आएगी तुम्हे

कलाइयों को कसके भींचता हुआ, खींचता है अपनी ओर

बिस्तर पर रेंगते हुए, बदन को कुचलता है

बेबसी और लाचारी में सिसकती है,

दबी सहमी नारी की देह पर ठहाकों से लिखता है, …

Continue

Added by sunita dohare on July 1, 2014 at 1:30am — 19 Comments

Monthly Archives

2015

2014

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
" कृपया और भी सदस्य अपना मंतव्य दें ।"
6 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"तरही का मुख्य उद्देश्य अभ्यास तक सीमित है, इस दृष्टि से और बहरों पर भी तरही मिसरे देना कठिन न होगा…"
13 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूस बिना कमीशन आजकल, कब होता है काम । कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।। घास…See More
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार। मुझे ऐसी ही एक चर्चा की अपेक्षा थी। आवश्यकता महसूस हो रही थी। हार्दिक धन्यवाद और…"
yesterday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सभी सम्मानित सदस्यों को सादर नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर सर द्वारा…"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय सदस्यों को नमस्कार, एक महत्वपूर्ण चर्चा को आरम्भ करने के लिए प्रबन्धन समिति बधाई की…"
yesterday
Admin posted a discussion

ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा

साथियों,विगत कई माह से ओ बी ओ लाइव आयोजनों में कतिपय कारणवश सदस्यों की भागीदारी बहुत ही कम हो रही…See More
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय  अखिलेश जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । सहमत एवं संशोधित "
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय सुशीलजी हार्दिक बधाई। लगातार बढ़िया दोहा सप्तक लिख रहें हैं। घूस खोरी ....... यह …"
yesterday
Jaihind Raipuri posted a blog post

वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं

ग़ज़ल 2122  1212  22वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैकितने दुःख दर्द से भरा दिल हैये मेरा क्यूँ हुआ है…See More
Mar 5
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । हार्दिक आभार आदरणीय । फागोत्सव…"
Mar 4
Nilesh Shevgaonkar and Dayaram Methani are now friends
Mar 4

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service