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Shaikh Zubair's Blog (3)

चार शेर ( फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन  )

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन

(बह्र: रमल मुसम्मन महजूफ)

2122. 2122. 212.

ज़िन्दगी भर ये परेशानी रही

मेरे चारो सम्त वीरानी रही ।।

जिस के पीछे अब ज़माना है पढ़ा

वो कभी मेरी भी दीवानी रही ।।

शब मिलन की थी बहुत गहरी मगर

रात भर तारो की निगरानी रही।।

दोस्ती कर ली किताबों से मैं ने

भूलने में उसको आसानी रही ।।

- शेख़ ज़ुबैर अहमद

( मौलिक एवम अप्रकाशित )

Added by Shaikh Zubair on March 15, 2020 at 6:57pm — 2 Comments

ग़ज़ल

फाइलुन फाइलुन फाइलुन

212 212 212

हम हैं नाकाम-ए-राह-ए-वफ़ा

काम आई तेरी बद-दुआ ।

इश्क़ की है अभी इब्तिदा ,

यार मुझ को न तू आज़मा।

रात भर जागता रहता है,

चाँद क्यों इतना है ग़म-ज़दा ।

वो पता पूछे तो बोलना

"कुछ दिनों से हूँ मैं लापता"

आखरी बार मुझ से मिलो ,

आखरी बार है इल्तिजा ।

अब नही देखता तुझ को मैं,

रायगाँ है सवरना तेरा ।

जा रहा हूँ तेरे दर से मैं

दिलरुबा ग़म छुपा,,मुस्कुरा |

- शेख ज़ुबैर अहमद

(मौलिक…

Continue

Added by Shaikh Zubair on February 1, 2020 at 4:33pm — 4 Comments

ग़ज़ल

फ़ऊलुन फ़ाइलातुन 1 2 2 2 1 2 2

मुहब्बत हो गई तो ?
क़यामत हो गई तो ?
सनम तू पास मत आ,
मुसीबत हो गई तो ?
कहानी पढ़ रहा हूँ ,
हक़ीक़त हो गई तो ?
मुझे तुम फ़ोन करना,
इबादत हो गई तो ।
सिपाही मैं अकेला ,
बग़ावत हो गई तो ?
खुदा तेरे जहाँ से ,
शिकायत हो गई तो?
- शेख़ ज़ुबैर अहमद मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Shaikh Zubair on June 12, 2019 at 1:41am — 3 Comments

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