For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

फाइलुन फाइलुन फाइलुन
212 212 212
हम हैं नाकाम-ए-राह-ए-वफ़ा
काम आई तेरी बद-दुआ ।

इश्क़ की है अभी इब्तिदा ,
यार मुझ को न तू आज़मा।

रात भर जागता रहता है,
चाँद क्यों इतना है ग़म-ज़दा ।

वो पता पूछे तो बोलना
"कुछ दिनों से हूँ मैं लापता"

आखरी बार मुझ से मिलो ,
आखरी बार है इल्तिजा ।

अब नही देखता तुझ को मैं,
रायगाँ है सवरना तेरा ।

जा रहा हूँ तेरे दर से मैं
दिलरुबा ग़म छुपा,,मुस्कुरा |
- शेख ज़ुबैर अहमद
(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 90

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Shaikh Zubair on February 8, 2020 at 7:29pm
विजय निकोरे जी आप का बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Shaikh Zubair on February 8, 2020 at 7:28pm
मोहतरम समर कबीर साहब बहुत बहुत शुक्रिया,आपकी कमेंट और इस्लाह के ही इनतेज़ार में था। जैसा आप ने बताया मैं उसे स्वीकार करता हूँ |
Comment by Samar kabeer on February 8, 2020 at 2:52pm

जनाब शैख़ ज़ुबैर जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

मतले के ऊला को सानी और सानी को ऊला करना उचित होगा ।

'रायगाँ है सवरना तेरा'

इस मिसरे में 'सवरना' को "सँवरना" कर लें ।

Comment by vijay nikore on February 2, 2020 at 2:39pm

बहुत ही खूबसूरत गज़ल। हार्दिक बधाई, मित्र शेख जुबैर अह्मद जी

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post मुँह ज़ख्मों के शे'र सुनाकर सीता है
"दोस्त मुझे बस तुझसे एक शिकायत है तू पहले से काफ़ी सिगरेट पीता है    मुहतरम समर कबीर साहब…"
9 minutes ago
Samar kabeer and Rupam kumar -'मीत' are now friends
12 minutes ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Samar kabeer's blog post "बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"
"अब आख़िरत का भी कुछ इन्तिज़ाम करता चलूँ दिल-ओ-ज़मीर को अपने मैं राम करता चलूँ      …"
14 minutes ago
Samar kabeer commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post मुँह ज़ख्मों के शे'र सुनाकर सीता है
"इसकी तक़ती'अ ऐसे नहीं होगी,22 से करें:- तू पह-22 ले से-22 ज़ियादा-122 जो उचित नहीं…"
17 minutes ago
Rupam kumar -'मीत' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post करेगा तू क्या मिरी वकालत (ग़ज़ल)
"आदरणीय रवि भसीन जी, मुझे अभी बहुत पढ़ना होगा इस ग़ज़ल को समझने के लिए आप ने बड़ी बात कही है शायद इस ग़ज़ल…"
43 minutes ago
Rupam kumar -'मीत' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post जो तेरी आरज़ू (ग़ज़ल)
"जो दबती जा रही हैं ख़्वाहिशें अबसवेरे देर तक सोने लगा हूँ  यह शेर मुझे बहुत पसंद आया रवि भसीन…"
48 minutes ago
Dimple Sharma commented on Dimple Sharma's blog post कहीं नायाब पत्थर है , कहीं मन्दिर मदीना है
49 minutes ago
Rupam kumar -'मीत' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post ख़ुदा ख़ैर करे (ग़ज़ल)
"बड़े शाइर की यही पहचान होती है, अगर काफ़िया साथ देने लगे तो ग़ज़ल में ५ शेर से ज़ियादा शेर दिखते है,रवि…"
52 minutes ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post ये ग़म ताज़ा नहीं करना है मुझको
"डॉ छोटेलाल सिंह  जी आपका तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ की आपने इस छोटे से बालक का हौसला…"
1 hour ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post मुँह ज़ख्मों के शे'र सुनाकर सीता है
"मुहतरम समर कबीर साहब जी, तू पहले       222 से ज़ि-यादा  11-22 सिगरेट …"
1 hour ago
Anvita posted a blog post

चाहती हूँ

दिवस के अवसान का,भ्रम नहीं पाले कोई, चाॅद की आमद के पीछे, आएगी ऊषा नई , ऊध्व॔मुख सूरजमुखी से होड़…See More
1 hour ago
Samar kabeer commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post मुँह ज़ख्मों के शे'र सुनाकर सीता है
"// "तू पहले से ज़्यादा सिगरेट पीता है"// 'ज़्यादा' शब्द पर जनाब अमीर साहिब से…"
1 hour ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service