For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कह मुकरियाँ [11 से 18] सरिता भाटिया

11.

दोस्ती मेरी सदा निभाए
न्यारी न्यारी बात बताए
बताए हरदम सही जवाब
क्या सखि साजन ? ना सखि किताब

12.

तुझ बिन जगत यह कड़की धूप
तेरे संग खिलता है रूप
कैसा तूने किया करिश्मा
क्या सखि साजन ? ना सखि चश्मा
13.

ज्यों चलूँ वो साथ ही हो ले
अंग संग खाए हिचकोले
मधुर सुरों से ह्रदय छले छलिया 
क्या सखि साजन ? ना पायलिया

14.

उलझे मेरे लट सुलझाता
न बोलूँ तो खीझ है जाता
रूप दिखाता रंग बिरंगा
क्या सखि साजन? ना सखि कंघा
15.
हर पल मेरा साथ निभाए
मेरे सारे राज छुपाए
उसके बिन मैं रहूँ अकेली
क्या सखि साजन? नहीं सहेली

16.

रैन हुई वो झट से आए
भोर हुई घर वापिस जाए
रूप लगे है उसका प्यारा
क्या सखि साजन ? ना सखि तारा

17.

चलती राह ले आँचल थाम
मेरी ना सुनता हाय राम
प्यार दिखाए न कभी डांटा
क्या सखि साजन? ना सखि कांटा

18.

रहूँ कहीं मैं साथ न छोड़े 
पथ के सभी हटाये रोड़े  
प्रीत है गहरी नहीं हिसाब  
क्या सखि साजन ? नहीं किताब

Views: 461

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 22, 2014 at 8:35pm

इस प्रयास के लिए हार्दिक बधाइयाँ आदरणीया. अच्छी कह-मुकरियों ने प्रभावित किया है.

सतत प्रयास आपके रचनाकर्म को और सुगठित करेगा.

मधुर सुरों से ह्रदय छले छलिया
इस पद में हृदय के जगह मन या उर किया जाय तो प्रवाह संयत बना रहता है. कृपया देखियेगा.
सादर

Comment by कल्पना रामानी on February 25, 2014 at 11:14pm

बहुत अच्छी मुकरियाँ कही हैं सरिता जी, हार्दिक  बधाई स्वीकार कीजिये

Comment by Sarita Bhatia on February 25, 2014 at 2:51pm

आदरणीय श्याम जी शुक्रिया 

Comment by Sarita Bhatia on February 25, 2014 at 2:50pm

आदरणीय गिरिराज जी बहुत आभारी हूँ आपकी आपने हमेशा मार्गदर्शन किया है 

इस पंक्ति को ऐसे पढ़ें 

मधुर सुर से मन छले छलिया 

Comment by Shyam Narain Verma on February 24, 2014 at 5:07pm
वाह ! बहुत खूब | सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई ......................

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 24, 2014 at 1:29pm

आदरणीया सरिता जी , कह्मुकरियों की शान्दार रचना हुई , आपको हार्दिक बधाइयाँ ॥

मधुर सुरों से ह्रदय छले छलिया  -  इस पंक्ति मी मात्रा 18 मात्रायें हो रही हैं , मेरे खयाल से 16 मात्रायें रहनी चाहिये ॥

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
25 minutes ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला गर किसी को भूल गया इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात…"
28 minutes ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक राज कपूर जी नमस्कार बहुत- बहुत धन्यवाद आपका आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आए और ऐसी बेहतरीन…"
54 minutes ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता 'अजेय' जी नमस्कार बहुत धन्यवाद आपका आपने समय दिया आपने सहीह फ़रमाया गुणी…"
1 hour ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक…"
1 hour ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात ही को भूल गया "
1 hour ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"इस सुझाव को विशेष रूप से रूहानी नज़रिये से भी देखेंहुस्न मुझ पर सवार होने सेशेष सारी कमी को भूल…"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई दयाराम जी, अभिवादन व आभार।"
5 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"हार्दिक आभार आदरणीय "
5 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय दयाराम जी नमस्कार  बहुत शुक्रिया आपका  सादर "
7 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक जी सादर अभिवादन  बहुत बहुत धन्यवाद आपका  बहुत अच्छे सुझाव हैं ग़ज़लमें निखार…"
7 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय रिचा यादव जी, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है। बधाई स्वीकार करें।"
10 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service