For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तरही ग़ज़ल नंबर-2

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन

आज तारीफ़ें मिरी उनकी ज़बानी हो गईं
हासिदों की देख शकलें ज़ाफ़रानी हो गईं

उनके रुख़सारों की गर्मी अलअमाँ सद अलअमाँ
सब चटानें बर्फ़ की यकलख़्त पानी हो गईं

आज हैं मासूम सीता की तरह ये रावणों
क्या करोगे लड़कियाँ गर ये भवानी हो गईं

देखते थे कल हिक़ारत से हमें वो देख लें
किस क़दर नस्लें हमारी आज ज्ञानी हो गईं

मैं तो हूँ ख़ामोश लेकिन लोग कहते हैं "समर"
तेरी ग़ज़लें एह्ल-ए-दिल की तर्जुमानी हो गईं

________

हासिदों :- जलने वाले
यकलख़्त :- फ़ौरन
अलअमाँ :- पनाह बख़ुदा
सद :- सौ बार

--समर कबीर
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 1266

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on April 9, 2017 at 8:23pm
बेहतरीन ग़ज़ल हुई है मोहतरम जनाब समर साहिब रावण और भवानी वाले शेर का क्या कहना, मुश्किल ज़मीन पर आपने तीसरी ग़ज़ल कह दी, यही आपको ओबीओ में विशिष्टता प्रदान करता है
Comment by Samar kabeer on April 9, 2017 at 7:39pm
//मेरे लिये आप काफी हैं//
बहुत बहुत धन्यवाद,इस सम्मान के लिये ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 9, 2017 at 6:09pm

/.( मेरे लिये आप काफी हैं ) /  आ. समर भाई , इसके बाद और कुछ रह जाता है क्या.. ? आपने कहा मैने माना ... बाक़ी बातें मैने उदाहरण के लिये कहीं ... कि मै इन उदाहरनों को नही मानता .. और आप जानते हैं मै क्यों नही मानता । क्या आप ये चाहतेगें कि मै भी गलत काफियाबन्दी कर के उदाहरण पेश कर दूँ ? मै जानता हूँ आप नही चाहेंगे । मै फिर कहता हूँ - .( मेरे लिये आप काफी हैं )

Comment by Samar kabeer on April 9, 2017 at 5:57pm
मैं किसी भी शब्द का प्रयोग दूसरों को देख कर नहीं करता,जब तक शब्कोष उसे सही न बताये,फिरोज़ुललुग़ात में पहले शब्द 'चटान'है और बाद में 'चट्टान'लिखा है,आप कहेंगे तो उस पेज की तस्वीर यहाँ दे सकता हूँ,उदाहरण में शैर पेश करना कोई बुरी बात तो नहीं,हाँ अगर किसी ने ग़लत शब्द लिया हो तो दूसरी बात है,लेकिन 'चटान'और 'चट्टान'दोनों सो फ़ीसदी सही है ।
जब आप मेरी बात को इतना सम्मान देते हैं तो भरोसा कीजिये,मैंने कोई गलत शब्द न तो इस्तेमाल किया है और न कभी करूँगा ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 9, 2017 at 5:37pm

आदरणीय समर भाई , मै व्यक्तिगत तौर पर तमाम शुअरा के शेर  के उदाहरण देने को सही नही मानता , चाहे वो शायर कोई भी हो , जितना पढ़ता जाता हूँ .. यही साबित होता जा रहा है ..कि सभी ने कभी न कभी अपने किसी शेर को बचाने के लिये अल्फाज़ से छेड़खानी की है । हाँ मै किसी को उन गलतियों को दुहराने से रोकता नही ... न ही रोक सकने की मेरी क़ुव्वत है । मै लुगाद मे लिखे को ही सच मानता हूँ ।

मैने केवल चटान पर शंका ज़ाहिर की थी .. कोई दावा नही किया था ... और वो भी इसलिये कि .. मद्दाह साहिब की लुगाद मे न तो चटान है और न चट्टान ... शायद आपकी फिरोज़ुल लुगाद मे हो । इसलिये मैने चट्टान को हिन्दी शब्द समझा ,और माना । ...  और हिन्दी मे मैने हमेशा चट्टान ही लिखा देखा ।

अदब के प्रति आपकी इमानदारी से कौन परिचित नही है ... आप कह रहे हैं तो चटान सही होगा ... किसी शेर के उदाहरण से आपकी बात कमज़ोर ही होगी . मेरी नज़र में .( मेरे लिये आप काफी हैं )

Comment by Samar kabeer on April 9, 2017 at 3:26pm
जनाब डॉ.गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आदाब,'चटान'और 'चट्टान' दोनों ही सही शब्द हैं,ये मैं नहीं,शब्दकोष कहता है,ग़ज़ल पर आपने कुछ नहीं कहा ?
Comment by Samar kabeer on April 9, 2017 at 3:18pm
जनाब गिरिराज भंडारी जी आदाब,आपने कभी मुझे उर्दू का कोई ग़लत शब्द इस्तेमाल करते नहीं देखा होगा,'चटान'और 'चट्टान'दोनों ही सही शब्द हैं,जिस तरह 'मर्ज़','मरज़','क़द्र','क़दर'वग़ैरह हैं,आपने 'साग़र आज़मी'की ग़ज़ल का मशहूर शैर नहीं सुना :-
'कश्मीर की वादी में बेपर्दा जो निकले हो
क्या आग लगाओगे बर्फ़ीली चटानों में'
सुख़न नवाज़ी के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Samar kabeer on April 9, 2017 at 3:08pm
जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on April 9, 2017 at 3:06pm
जनाब सुशील सरना जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on April 9, 2017 at 3:03pm
जनाब यमित पुनेथा जी आदाब,आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"अमराई में उत्सव छाया,कोयल को न्यौता भिजवाया। मौसम बदले कपड़े -लत्ते, लगे झूमने पत्ते-…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"ठण्ड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं बौराने। पंछी गाते सुर में…"
Tuesday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"लघुकथा किसी विसंगति से उभरती है और अपने पीछे पाठको के पीछे एक प्रश्न छोड़ जाती है। सबकुछ खुलकर…"
Tuesday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश जी स्वयं के प्रचार प्रसार के लिए इस तरह के प्रायोजित कार्यक्रमों का चलन साहित्य और…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"  जी ! //हापुस लँगड़ा नीलम केसर। आम सफेदा चौसा उस पर।।//... कुछ इस तरह किया जा सकता है.…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service