For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ज़िन्दान-ए-हिज्र से अरे आज़ाद हो ज़रा (८३ )

( 221 2121 1221 212 )

ज़िन्दान-ए-हिज्र से अरे आज़ाद हो ज़रा 

नोहे* तू क़त्ल-ए-इश्क़ के दुनिया को मत सुना 

**

अक़्स-ए-रुख़-ए-सनम तेरे आएगा रू ब रू

माज़ी के आईने पे लगी धूल तो हटा 

**

दुनिया में जीने के लिए हैं और भी सबब

चल नेकियों के वास्ते कुछ तू समय लगा

**

फिर साज़-ए-दिल पे छेड़ कोई राग पुरसुकूँ

दुनिया के वास्ते नया पुरअम्न गीत गा

**

हैं इंतज़ार में तेरी दुनिया की महफिलें

तन्हाइयों के साथ का अब छोड़ सिलसिला

**

उम्मीद रोशनी की है तुझसे जहान को

अब तीरगी में यार तू ऐसे न मुँह छुपा

**

होता है आसमान में भी रख यक़ीं सुराख़

लेकिन है कोशिशों से ही मुमकिन ये मोजिज़ा

**

हिम्मत को हारना नहीं है मुश्किलों का हल

इनका मुक़ाबला बचा है सिर्फ़ रास्ता

**

बर्बाद इश्क़ कर के तेरा वो मज़े से है

साथी 'तुरंत' दर्द तू अपना भी दे भुला

**

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' बीकानेरी |

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 25

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( नहीं था इतना भी सस्ता कभी मैं....)
"आदरणीय अमीरुद्दीन ख़ान साहब आदाब ग़ज़ल पर उपस्थिति एवं सराहना के लिए हृदय से आभार."
3 minutes ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( नहीं था इतना भी सस्ता कभी मैं....)
"आदरणीय समर कबीर साहब आदाब ग़ज़ल पर उपस्थिति एवं सराहना के लिए हृदय से आभार. जनाब क्या सस्ते और मंहगे…"
4 minutes ago
अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़़ज़़ल- फोकट में एक रोज की छुट्टी चली गई
"जनाब राम अवध विश्वकर्मा जी, आदाब। ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है। बधाई स्वीकार करें। कुछ कमियों की तरफ़…"
7 minutes ago
विनय कुमार commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़़ज़़ल- फोकट में एक रोज की छुट्टी चली गई
"//ये बुद्ध की कबीर की चिश्ती की है जमीनफिर आप भाँजते हैं क्यूँ तलवार ख्वामखाह//, लाजवाब शेर…"
58 minutes ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post गुरूर- लघुकथा
"इस सकारात्मक और उत्साह बढ़ाने वाली टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ समर कबीर साहब"
1 hour ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post गुरूर- लघुकथा
"इस सकारात्मक और उत्साह बढ़ाने वाली टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर जी"
1 hour ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post गुरूर- लघुकथा
"इस सकारात्मक और उत्साह बढ़ाने वाली टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ तेज वीर सिंह जी"
1 hour ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post अब नहीं- लघुकथा
"इस टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ रक्षिता सिंह जी"
1 hour ago
अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " shared their blog post on Facebook
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मजदूर अब भी जा रहा पैदल चले यहाँ-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए आभार ।"
3 hours ago
Hariom Shrivastava posted a blog post

योग छंद

छंद विधान [20 मात्रा,12,8 पर यति,अंत 122 से]मन में हो शंका तो, खून जलाए।ऐसे  में  रातों को, नींद …See More
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मजदूर अब भी जा रहा पैदल चले यहाँ-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि भसीन जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार ।  बह्र के विषय…"
3 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service