For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मेरे नाम की पाति

आज गाँव से पाति आई,

माँ के चरणों की मिट्टी लायी

वैसे तो ये बस धूल है लेकिन,

इसमे अपनों की महक समाई

पाति में सबके हिस्से है,

सबके अपने-अपने किस्से है

कहीं प्रेम है, कहीं वात्सल्य है,

और पिता के दर्द छिपे है

 

जैसे-जैसे पाति खुलती,

याद सभी की साथ में चलती

सब के मन की बात है उसमे,

शब्द भाव में है घुल जाती

लिफ़ाफ़े पर नाम मेरा है,

अंदर सारा हाल लिखा है

क्युं परदेशी मैं बन बैठा हूँ,

सभी के मन को ये खलता है

 

थल की दूरी पाट दे कोई,

मन की दूरी पाट ना पाए

देश पड़ोसी हो तो क्या है,

जो वो मन का मीत ना होए

अबके बरस जो फसल उगाई,

बिन मेरे ना होत कटाई

अंधियारी सुनी कुटिया में,

तुझ बिन न दीप जलावे कोई

 

वैसे तो सब हीं ज़िंदा है,

पर दिखने में लगते मुर्दा है

आँख से आँसू अब ना बहते,

जब डोर लहू जुड़े न रहते

तोरे बापू कुछ ना कहते,

तेरे आहट को तकते रहते

माँ भी तेरी चल ना सकती,

पर तुलसी की फेरे करती

 

तेरी बहुरिया बन गयी दासी,

तुझ बिन उसकी यौवन उदासी

बस सिंदूर का शृंगार दिखे है,

मन तो लाचार दिखे है

डोली चढ़त बहनिया बोली,

क्यूँ ना तेरे संग वो रो ली

क्यूँ तुझसे मिलने के पहले,

हाथ ये उसकी पीली होली


अब तो वो आम भी सूखा,

जिसमे तूने जान था फूंका

ताल का पानी हो गया खारा,

तेरे जाने से जल गया सारा

अब तो लौट तू घर को आजा,

एक बात को दरस दिखा जा,

ऐसे धन का करना क्या है,

जब अपनों से दूर रहना है

 

इतना तो हम कर पाएंगे,

तेरा पेट भी भर पाएंगे

पर जो तु हमरे साथ ना होगा,

हम एक दाना ना खा पाएंगे

जैसे तुझ तक पाति पहुंचे,

अपनी बेचैनी भी पहुंचे

पांव तेरे रुके न तबतक,

जब तक तू घर को ना पहुंचे

"मौलिक व अप्रकाशित" 

अमन सिन्हा 

Views: 16

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"जी बहुत बहुत शुक्रिया आ टाइपिंग मिस्टेक " समन्दर " की ओर ध्यानाकर्षण के लिए भी सहृदय…"
3 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक ..रिश्ते
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय ।"
33 minutes ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"आदरणीय Aazi जी नमस्कार अच्छी ग़ज़ल कही आपने बधाई स्वीकार कीजिये"
1 hour ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"आदरणीय Aazi जी  बहुत शुक्रिया आपका सlदर"
1 hour ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"आदरणीय अमित जी बहुत ख़ूबसूरत कहा शुक्रिया आपका सादर"
1 hour ago
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"बधाई स्वीकार करें आ अच्छी ग़ज़ल हुई 4 में सूर्य की धूप स्त्रीलिंग होती है बाकी गुणीजनों की इस्लाह…"
1 hour ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"आदरणीय आज़ी तमाम जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।"
2 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, सुंदर ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
2 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"आदरणीय रचना भटिया जी, सुंदर ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई।"
2 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"आदरणीय अमित जी, सुंदर ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई।"
2 hours ago
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"बधाई स्वीकार करें आ अच्छी ग़ज़ल हुई इस्लाह अच्छी हुई और बेहतर हो जायेगी"
2 hours ago
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"बधाई स्वीकार करें आ अच्छी ग़ज़ल हुई इस्लाह भी अच्छी हुई"
2 hours ago

© 2024   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service