For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गौरवान्ज्जली - शहीद की पत्नी के नाम एक पत्र

अपने मन को मुर्झाने मत देना 

अपने बच्चों की दुनियाँ को कुम्हलाने मत देना 

बच्चे यदि पापा से मिलने को मचलें ,तो उन्हें ,

समन्दर की लहरें दिखा लाना ,

बगीचे में जाकर फूलों की खुशबू सुंघा लाना |

 

क्या हुआ जो एक जिन्दगी ने 

'अपने अनगिनत बसंत देश के नाम लिख दिए ?                        

लोग पतंगों की मानिंद जी कर ,

इस दुनियाँ से विदा हो जाते हैं , 

तुम फक्र करना की तुम्हारे पति ने अपना चोला 

बसंती रंग लिया,

देश  के लिए अपनी जां निसार कर गया .|

इतिहास  अपने वतन के  इन शहीदों की मिसाल को ,

अपने पन्नों पर ,सुनहरे रंग की छटा से

सराबोर रखेगा, शहादत के नाम पर |

 

मैं  समझ  सकती हूँ ,जिंदगी भुलावे में नहीं जी जा सकती 

मैं समझ सकती  हूँ   जिंदगी छलावे में नहीं जी जा सकती 

लेकिन, हिम्मत से काम लेना ,

तुम उस देश की मिटटी में जन्मी हो ,जहां 

हर पल -हर क्षण ,एक माता ,शहीद को जन्म देती है |

 

ये राजस्थान ,ये पंजाब ,ये महाराष्ट्र ,

ये सारे  हिंदुस्तान की धरती हे ,

जो शहीदों की शहादत की कहानी कहती है | 

स्वयं आँसू पी  लेना 

नाज  करना अपने शहीद की पत्नी होने पर 

गरल पीने वाले ही शिवशंकर बनाते हैं |

मत समझना इन्हें शब्दों की कोरी सहानुभूति 

ये है  एक  नहीं, अनेक संवेदनशील 

भारतवासियों की, गौरवांजली |

 

शहीद की शहादत की सुगंध , 

इस देश की

ये बासंती हवाएं पहुंचाएंगी ,सरहद के पार 

जहाँ कोई, उस वतन की तुम्हारी सखी सहेली ,

कोई माँ ,तुम्हारे ही जैसी पीड़ा झेल रही होगी ,

शायद, शायद वो अपने कोख के बच्चे को कहे ,

अमन चैन का रास्ता चुनना 

किसी माँ की कोख सूनी मत करना ,

किसी पत्नी का सुहाग मत उजाड़ना 

हो सके तो ,किसी बेटे को 

माँ की बूढ़ी पथरायी आँखों से मिला देना 

किसी पत्नी की माँग को सुरमई रंग दे देना 

पापा को उनकी नन्ही कलियों और कोंपलों से मिला देना 

भाई को बहिन की रंगीन राखियों से |

 

ये भारत देश है ,

यहाँ कोई सीता अग्नि-परीक्षा से नहीं डरती ,और 

कोई शहीद की विधवा "राष्ट्र धर्म" निभाने से पीछे नहीं हटती |

 

अपने मन को मुर्झाने मत देना 

अपने बच्चों की दुनियाँ को कुम्हलाने मत देना 

बच्चे यदि पापा से मिलने को मचलें ,तो उन्हें ,

समन्दर की लहरें दिखा लाना ,

बगीचे में जाकर फूलों की खुशबू सुंघा लाना |

 

क्या हुआ जो एक जिन्दगी ने 

'अपने अनगिनत बसंत देश के नाम लिख दिए ?                        

लोग पतंगों की मानिंद जी कर ,

इस दुनियाँ से विदा हो जाते हैं , 

तुम फक्र करना की तुम्हारे पति ने अपना चोला 

बसंती रंग लिया,

देश  के लिए अपनी जां निसार कर गया .|

इतिहास  अपने वतन के  इन शहीदों की मिसाल को ,

अपने पन्नों पर ,सुनहरे रंग की छटा से

सराबोर रखेगा, शहादत के नाम पर |

 

मैं  समझ  सकती हूँ ,जिंदगी भुलावे में नहीं जी जा सकती 

मैं समझ सकती  हूँ   जिंदगी छलावे में नहीं जी जा सकती 

लेकिन, हिम्मत से काम लेना ,

तुम उस देश की मिटटी में जन्मी हो ,जहां 

हर पल -हर क्षण ,एक माता ,शहीद को जन्म देती है |

 

ये राजस्थान ,ये पंजाब ,ये महाराष्ट्र ,

ये सारे  हिंदुस्तान की धरती हे ,

जो शहीदों की शहादत की कहानी कहती है | 

स्वयं आँसू पी  लेना 

नाज  करना अपने शहीद की पत्नी होने पर 

गरल पीने वाले ही शिवशंकर बनाते हैं |

मत समझना इन्हें शब्दों की कोरी सहानुभूति 

ये है  एक  नहीं, अनेक संवेदनशील 

भारतवासियों की, गौरवांजली |

 

शहीद की शहादत की सुगंध , 

इस देश की

ये बासंती हवाएं पहुंचाएंगी ,सरहद के पार 

जहाँ कोई, उस वतन की तुम्हारी सखी सहेली ,

कोई माँ ,तुम्हारे ही जैसी पीड़ा झेल रही होगी ,

शायद, शायद वो अपने कोख के बच्चे को कहे ,

अमन चैन का रास्ता चुनना 

किसी माँ की कोख सूनी मत करना ,

किसी पत्नी का सुहाग मत उजाड़ना 

हो सके तो ,किसी बेटे को 

माँ की बूढ़ी पथरायी आँखों से मिला देना 

किसी पत्नी की माँग को सुरमई रंग दे देना 

पापा को उनकी नन्ही कलियों और कोंपलों से मिला देना 

भाई को बहिन की रंगीन राखियों से |

 

ये भारत देश है ,

यहाँ कोई सीता अग्नि-परीक्षा से नहीं डरती ,और 

कोई शहीद की विधवा "राष्ट्र धर्म" निभाने से पीछे नहीं हटती |

  • मोहिनी चोरडिया

 

 

 

Views: 385

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 14, 2011 at 10:46pm

इस भावपूर्ण कविता पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 14, 2011 at 8:37pm

मोहिनी जी, बेहद मार्मिक रचना बन पड़ी है, भावनाओं की बेहतरीन अभिव्यक्ति , बधाई कुबूल कीजिये |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहे -रिश्ता
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी रिश्तों पर आधारित आपकी दोहावली बहुत सुंदर और सार्थक बन पड़ी है ।हार्दिक बधाई…"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"तू ही वो वज़ह है (लघुकथा): "हैलो, अस्सलामुअलैकुम। ई़द मुबारक़। कैसी रही ई़द?" बड़े ने…"
Monday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"गोष्ठी का आग़ाज़ बेहतरीन मार्मिक लघुकथा से करने हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय मनन कुमार सिंह…"
Monday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"आपका हार्दिक आभार भाई लक्ष्मण धामी जी।"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"आ. भाई मनन जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई।"
Monday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"ध्वनि लोग उसे  पूजते।चढ़ावे लाते।वह बस आशीष देता।चढ़ावे स्पर्श कर  इशारे करता।जींस,असबाब…"
Sunday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"स्वागतम"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अजय जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अमित जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए धन्यवाद।"
Saturday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service