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मौसम आया लुभावना मनभावना
चलो सखी झूला झूलें |
झूला झुलाने सखी पी मेरे आये
तन मन हुआ लुभावना
चलो सखी झूला झूलें |


पड़ रही फुहारें सावन की
सावन की मन भावन की
मौसम बड़ा सुहावना
चलो सखी झूला झूलें |

मेघा गरजे रिमझिम बरसे

बिजली हिय में कोंधे
कोयल कूक लगावना
चलो सखी झूला झूलें |


धानी चूनर ओढ ली सखी
साजन के रंग में रंगी
प्रियतम प्रीत लुटावना
मन्द- मन्द मुस्कावना
चलो सखी झूला झूलें |

 

मोहिनी चोरडिया

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Comment

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Comment by Shanno Aggarwal on August 15, 2011 at 4:08am
वाह ! मोहिनी जी, सावन पर बहुत मनभावन गीत...


पड़ रही फुहारें सावन की
सावन की मन भावन की
मौसम बड़ा सुहावना
चलो सखी झूला झूलें |

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 14, 2011 at 10:10pm

गीत के लिये बधाई.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 14, 2011 at 8:53pm

मेघा गरजे रिमझिम बरसे
बिजली हिय में कोंधे
कोयल कूक लगावना
चलो सखी झूला झूलें |


बहुत ही खुबसूरत गीत, पारंपरिक बिम्बों का प्रयोग बढ़िया लगा , बधाई आपको |

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