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ग़ज़ल :- झूठ जब भी सर उठाये वार होना चाहिए

ग़ज़ल :-  झूठ जब भी सर उठाये वार होना चाहिए
 
झूठ जब भी सर उठाये वार होना चाहिए ,
सच को सिंहासन पे ही हर बार होना चाहिए |
  
बात की गांठें ज़रा ढीली ही रहने दो मियाँ ,
हो किला मज़बूत लेकिन द्वार होना चाहिए |
 
फ़िक्र ऐसी हो कि हम फाके में भी सुलतान हों ,
क्या ज़रूरी है  कि बंगला - कार होना चहिये |
 
मैं कि दुनिया से मिलूँ कैफ़ी और साहिर की तरह ,
पास तुम आओ तो  मन गुलज़ार होना चाहिए |
 
घर से शाला तक मेरा बचपन कहीं गुम हो गया ,
जी करे हर रोज़ ही इतवार होना चाहिए |
 
साफ़गोई है तो दिल चेहरे से झांकेगा ज़रूर ,
आदमी लिपटा हुआ अखबार होना चाहिए |
 
मुल्क की खातिर फकत झंडे न फहराएँ हुजूर ,
इश्क है तो इश्क का इज़हार होना चाहिए |
 
                              - अभिनव अरुण [05102011]
 
 
 
 
 
 
 
 

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Comment by Abhinav Arun on October 14, 2011 at 6:53pm
vivek ji apki tippani ka shukriya.
Comment by विवेक मिश्र on October 14, 2011 at 7:53am

/मैं कि दुनिया से मिलूँ कैफ़ी और साहिर की तरह ,

पास तुम आओ तो मन गुलज़ार होना चाहिए /

अरुण जी! वैसे तो सारे अश'आर ही उच्च कोटि के हैं. पर ऊपर कोट किया हुआ शे'र और इसमें निहित कोमल सी इच्छा ने तो बस दिल छू लिया. ईश्वर, आपकी लेखनी को इसी तरह धार प्रदान करता रहे. ढेरों बधाईयाँ.

Comment by Abhinav Arun on October 10, 2011 at 11:48am

हार्दिक आभार श्री श्यामल जी आपकी टिप्पणी मेरा उत्साह बढ़ने वाली है !!

Comment by Shyam Bihari Shyamal on October 10, 2011 at 7:05am

मैं कि दुनिया से मिलूँ कैफ़ी और साहिर की तरह ,
पास तुम आओ तो  मन गुलज़ार होना चाहिए |
 
घर से शाला तक मेरा बचपन कहीं गुम हो गया ,
जी करे हर रोज़ ही इतवार होना चाहिए |
 
साफ़गोई है तो दिल चेहरे से झांकेगा ज़रूर ,
आदमी लिपटा हुआ अखबार होना चाहिए |
... वाह... दिल को छूने वाले शेर... बधाई मित्रवर अरुण अभिनव जी... 

Comment by Abhinav Arun on October 8, 2011 at 4:45pm
THANKS SIYA JI.
Comment by siyasachdev on October 8, 2011 at 11:44am

मैं कि दुनिया से मिलूँ कैफ़ी और साहिर की तरह ,
पास तुम आओ तो  मन गुलज़ार होना चाहिए |
 
घर से शाला तक मेरा बचपन कहीं गुम हो गया ,
जी करे हर रोज़ ही इतवार होना चाहिए |
 
साफ़गोई है तो दिल चेहरे से झांकेगा ज़रूर ,
आदमी लिपटा हुआ अखबार होना चाहिए | wah bahut khoob umda sher behtareen ghazal 

Comment by Abhinav Arun on October 6, 2011 at 8:36pm

आभार आदरणीया मोहिनी जी !!

Comment by mohinichordia on October 6, 2011 at 8:22pm

पहली दो  और अंतिम दो पंक्तियों ने मन  को हिला दिया | बधाई अभिनव अरुण जी \

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