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रावण बार -बार जिन्दा क्यों होता है

राम और रावण
दोनों बसते है ...
मेरे /आपके हृदय में ॥
दोनों में चलता रहता है ...
एक युध्ध ...अहर्निश ॥
कभी राम सबल होता है
तो कभी रावण ॥

सुबह उठता हू ...
नित्य क्रिया कर
भगवान् की मूर्ति के सामने
आरती गाता हू
धुप जलाता हू ....
तब मेरा राम सबल रहता है
भिखारी को दान देना अच्चा लगता है
वृद्ध माता -पिता पूजनीय लगते है
सबसे प्रेम से बातें करता हू ....

जैसे -जैसे दिन बीतता है ...
झूठ /धोखा /बेईमानी का
फल चखता हू ....
तब मेरे अन्दर का राम ...
हारने लगता है ...मेरे दोस्त
रावण सबल होने लगता है ॥

हम जलाते है ...
रावण को हर दशहरे में
फिर क्यों नहीं मरता
मेरे अन्दर का रावण ॥

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Comment

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Comment by आशीष यादव on August 22, 2010 at 9:31am
pranaam,
man ki aanke khol praani. khubsurat vichaar aapne rakha. aakhir itni baar jalaane par raawan ko to mar hi jana chahiye, lekin ham man ke raawan ko jalaate hi kab hai, jab use koi apne satsang se maarne ki koshish karta bhi hai to ham use apne hi hriday ke kisi kone me chhipa lete hai. sochna padega kaise marega raawan. kaise raam sabal hoga.
bahut khub

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 22, 2010 at 7:20am
हम जलाते है ...
रावण को हर दशहरे में
फिर क्यों नहीं मरता
मेरे अन्दर का रावण ॥
बड़ी खूबसूरती से आप ने राम और रावण के भेद को बता दिया है, मैं तो यही कहना चाहता हूँ कि..........

लालच की लंका जब तलक बसा रहेगा अन्दर ,
रावण राम पर हावी रहेगा निरंतर,
उस लालच की लंका को जलाना होगा,
अगर चैन वो अमन से रहना है तो,
रावण को मार राम को जिताना होगा,

अंततः बहुत ही अच्ची रचना बब्बन भईया, धन्यवाद,

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on August 21, 2010 at 9:31pm
यक़ीनन सबसे बड़ा रावण तो मन के अन्दर ही घर किये हुए बैठा है| जिस दिन इसका वध हो जाये उस दिन सबसे बड़ी विजयादशमी हो| बबन भैया अच्ची रचना |

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