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देखा है मेने अपने पिता को, अपने कंधो पर मेरी स्कुल बैग टांगे,
जीवन के बोझ को बड़ी मुस्कराहट के साथ निभाते, ।
हमेशा जिसने अपने दर्द से दुनिया के दर्द को बड़ा माना
लड़ता रहा वो मजबूरो और असाहायों के लिए
सारे ग्रहों की परिभाषाओ को निष्फल होते देखा है
मेने  अपने पिता के आगे,
आज मुझ को घमंड है की  तुम हो मेरे पिता
हां जिसने मुझको दिया है अपने खून का एक कण
जो आज एक वजूद बनकर खड़ा है इसी दुनिया के लिए कुछ करने को
हां मुझको गर्व है की तुम मेरे पिता हो।

तुम मुझको बना ना सके इंजीनियर या डॉक्टर,
हां तुमने मुझको दिया है अपनी रगों मै वो  खून
जो सारी उम्र लड़ता रहेगा इस दुनिया की कुरीतियों के खिलाफ, और गरिबों  के हको के लिए
आज समझ सका  हु  इतना बड़ा होकर भी तुमने अपने को इतना छोटा क्यों बनाए रखा!
छोटा आदमी ही इंसान के सबसे करीब होता है ना।
हां और अपनी जगह तो इस दुनिया मै बनाने की जगह दिलो मै बनानी चाहिए ,
किसी चोराहे पर मूर्ति लगाना इतना उचित तुमने नहीं समझा

जितना ठण्ड से बीमार लोगो को तुमने अपना ओढा  कम्बल  देना समझा
तुम्हारे अन्दर कें इंसान  को तो ना जाने कब से समझ चुका हु,
पर आज मुझको महसूस हुआ  है तुम्हारे तन की यह  असहनीय पीड़ा |

लोग भगवान   को  मंदिरों मै ढुढते  है और मैंने अपने को हमेशा  फ़रिश्ते  के करीब पाया |
क्यों नहीं  मिला कोई बुरा करने वाला ? मुझको इस जीवन मै आज समझ सका  हूँ |
क्योकि मेरी रगो मै तुम्हारा ही खून दोड़ रहा है, जो क्षमता रखाता  है दर्द के खिलाफ लड़ने की |
हां! मुझको याद है अपने पिता का अपने कंधो पे अपनी बहन और मेरा बस्ता  टांग कर चलना और

अपनी ही कविताओ को गुनगुनाते हुए, दर्द को भुला देना|
मेरे पिता! तुम कभी हारना नहीं, क्योकि मेरीआत्मा तुझ मे बसकर ही जी रही है |
मुझको अभी तुम्हारी बहुत जरुरत है इस दर्द के खिलाफ।
अब तक कही तुम तनहा थे लेकिन अब साथ हूँ मै भी, अब तुम्हारे इस दर्द के खिलाफ |
लाखो की जायदाद से भी अमूल्य चीज दी है तुमने मुझको
मेरे पिता ! हां तुमने अपनी आत्मा के दर्द का  स्वामी बना दिया मुझको आज |
दुनिया की सबसे बड़ी नियामत दी है तुमने मुझको आज
हां आज ये राहू निकल पढा है उदित होते नये सूरज के साथ,
और लाया है मेरे जीवन मै  नया सवेरा अपने पिता के साथ|
हां! मुझको याद है तुम्हारा  मुझको समझाना, वो परिभाषा इंसान  होने की।
तुम्हारे कठोर शबदो के पीछे छिपे असीम स्नेह को आज समझ चुका  हु |
खुश  हूँ  की तुने मुझको  इंजीनियर या डोक्टर नहीं बनाया|
हां तुमने मुझको बनया है दर्द के खिलाफ लड़ने वाला एक इंसान,
हां मेरी आँखों से बहते हुए आंसू महसूस कर रहे है तुम्हारे उस असीम स्नेह को,
ओ मेरे पिता !  ओ मेरे पिता !
 

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