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बात करियॆ,,,,
-------------------
साफ़गॊई सॆ आप यूं, सब सॆ बात करियॆ ॥
जिस सॆ भी करियॆ, अदब सॆ बात करियॆ ॥१॥


बॆ-वज़ह बात करना, भी मुनासिब नहीं,
मुनासिब हॊ जब सॆ, तब सॆ बात करियॆ ॥२॥


बात की बात मॆं, बनती बिगड़ती है बात,
किसी सॆ न कभी ,बॆअदब सॆ बात करियॆ ॥३॥


बात कॊ गॊल-मटॊल, न घुमाइयॆ ज़नाब,
हर एक कह रहा है, कब सॆ बात करियॆ ॥४॥


इतिहास औ भूगॊल, सुनानॆ सॆ क्या मज़ा,
आयॆ हैं आप जिस, सबब सॆ बात करियॆ ॥५॥


इस चार दिन की ज़िंदगी मॆं गुरूर कैसा,
दोस्त हॊ या दुश्मन, सब सॆ बात करियॆ ॥६॥


कत्लॆ-आम की इज़ाज़त नहीं दॆता कॊई,
आप चाहे जिस, मज़हब सॆ, बात करियॆ ॥७॥


तंज कसनॆ का इल्म, आना भी जरूरी है,
बुरा न लगे ऎसॆ, करतब सॆ बात करियॆ ॥८॥


बात करना या न करना, मर्जी है आपकी,

आप कॆ दिल मॆं आयॆ, जब सॆ बात करियॆ ॥९॥


गम कॆ हर पड़ाव पॆ, यही बॆहतर है "राज"
वक्त निकालियॆ और, रब सॆ बात करियॆ ॥१०॥



      कवि-राज बुन्दॆली,,
      ०३/०२/२०१२

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Comment

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Comment by कवि - राज बुन्दॆली on February 4, 2012 at 3:53pm

धन्यवाद,,,गणॆश भाई,,,,,,,,,हृदय सॆ आभारी हूं आप का एवं ओ.बी.ओ. परिवार का,,,,,,,,,,,,,,,,


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 4, 2012 at 3:32pm

वाह वाह कविराज, अच्छी ग़ज़ल पढ़ी है आपने, बात से बात निकाल अच्छे शेर पढ़े है , दाद कुबूल करें |

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on February 3, 2012 at 11:53pm

आप सभी कॊ प्रणाम करता हूं,,,,,

    आपका ,,,,,

 कवि-राज बुन्देली

--------------------------------------

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on February 3, 2012 at 11:51pm

अविनाश भाई साहब ,,,,,आपने तो इस रचना को धन्य कर दिया,,,,,,,,,,,,,,,,

आभारी हूं दिल सॆ आपका,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,धन्यवाद,,,,,,,,,,,,,,,,,,

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on February 3, 2012 at 11:50pm

दिलबाग जी,,,बहुत-बहुत शुक्रिया,,,,,,

और आप के कहन अनुसार मक्ता पेश है,,,,,,,

गम कॆ हर पड़ाव पर,यही बॆहतर है "राज"
वक्त निकालियॆ और, रब सॆ बात करियॆ ॥

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on February 3, 2012 at 11:47pm

आशुतोष जी बहुत-बहुत धन्यवाद,,,,,,,,,,,,,,,,,

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on February 3, 2012 at 11:47pm

आदरणीय,,,नीरज जी,,,आभारी हूं आपका,,,,,,,,,,,,,,,,

Comment by dilbag virk on February 3, 2012 at 9:10pm

उम्र कॆ इस पड़ाव पॆ,यही बॆहतर है "राज"
वक्त निकालियॆ और, रब सॆ बात करियॆ ॥ ---- आभी से ?

बहुत खूब

Comment by AVINASH S BAGDE on February 3, 2012 at 8:47pm

बात करियॆ,,,,
-------------------
साफ़गॊई सॆ आप यूं, सब सॆ बात करियॆ ॥
जिस सॆ भी करियॆ, अदब सॆ बात करियॆ ॥१॥..KYA BAT HAI.

बॆ-वज़ह बात करना, भी मुनासिब नहीं,
मुनासिब हॊ जब सॆ, तब सॆ बात करियॆ ॥२॥...WAH.

बात की बात मॆं, बनती बिगड़ती है बात,
किसी सॆ न कभी ,बॆअदब सॆ बात करियॆ ॥३॥..बात है.

बात कॊ गॊल-मटॊल, न घुमाइयॆ ज़नाब,
हर एक कह रहा है, कब सॆ बात करियॆ ॥४॥SAHI HAI.

इतिहास औ भूगॊल, सुनानॆ सॆ क्या मज़ा,
आयॆ हैं आप जिस, सबब सॆ बात करियॆ ॥५॥...मज़ा AAYA.

उम्र कॆ इस पड़ाव पॆ,यही बॆहतर है "राज"
वक्त निकालियॆ और, रब सॆ बात करियॆ ॥६॥.."राज" JI ,BAHUT KHOOB.

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