For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

प्रभुता  की बागडोर आप सबके ही हाँथ,
चेतना में आके मान  देश  का  बढाइये.
काम कुछ  ऐसे करो रिपु भी दहल जाये,
जन -गण मन पूरे  विश्व  से  पढ़ाइये. 
अस्मिता से खेलने को जो बढ़ाये हाँथ आगे ,
काट  दो  वो  हाँथ  और  कफ़न  उढ़ाइए  .
संतति अनूप यदि माता भारती की हो तो,
देश  रक्षा  हेतु  भेंट  खुद  को  चढ़ाइए ..

जाति, धर्म, संप्रदाय में न बांटो देश यारों ,
फैंसला तुम्हारा तुम्हे भारी पड़ जाएगा.
क्यों प्रमत्त घूमते हो चित्त में सुधार करो,
देखना  तिरंगा सीमा पार गड़ जाएगा. 
एक पग  भूमि यदि छीनने को शत्रु बढ़े,
घाव ऐसे देंगे कि वो पाँव सड़ जायेगा. 
ढूढने से चित्र  मानचित्र में मिलेगा नहीं ,
जिद पे जो कोई देशभक्त अड़ जायेगा.. 

क्या लड़ेंगे बैरियों से किसपे गुमान करें ,
छत जो बचा न पाए अपने मकान क़ी.
स्वार्थपरता क़ी सीढ़ियों पे जो कदम चलें, 
कीमत लगाऊ मैं क्या उनके थकान  क़ी .
बीज विस्फोटकों का बेंच रहा सरेआम, 
धज्जियाँ उड़ा दो ऐसे बारूदी दुकान क़ी .
हो न पाए अनुक्षय स्वाभिमान भारत का ,
आभा कम हो न पाए माँ के मुस्कान क़ी ..

Views: 625

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on March 1, 2012 at 12:56am

श्री सौरभ सर जी सादर  प्रणाम स्वीकार करें , उत्साहवर्धन के लिए आपका आभार व शत- शत वंदन, 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 1, 2012 at 12:38am

भाई शैलेन्द्रजी, आपकी इस मंच पर कोई पहली रचना देख रहा हूँ.  घनाक्षरी छंद में प्रस्तुत माँ भारती के प्रति नमन स्वरूप इस रचना पर शैलेन्द्रजी आपको हार्दिक बधाइयाँ.  सभी छंद अत्यंत समृद्ध हैं.

आपकी उपस्थिति आशान्वित कर रही है, शैलेन्द्रजी.

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on February 29, 2012 at 9:03am

श्री अरुण जी उत्साहवर्धन के लिए आपको कोटि कोटि धन्यवाद 

Comment by Abhinav Arun on February 29, 2012 at 8:26am

शैलेन्द्र जी इस रचना की जितनी तारीफ की जाए कम गहरे भाव और सशक्त अभिव्यक्ति बहुत बहुत शुभकामनाएं आपको !!

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on February 25, 2012 at 11:30am

 राजेश कुमारी मैम कृति को समर्थन देने के लिए एवं स्नेहाशीष  प्रदान करने के लिए आपको मेरा शत शत वंदन व अभिनन्दन 

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on February 25, 2012 at 11:21am

श्री गणेश सर कृति पर समर्थन एवं मेरा मनोबल बढ़ाने के लिए आपको कोटि कोटि धन्यवाद


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 25, 2012 at 11:07am

वाह वाह शैलेंद्र जी आपकी लेखनी को सलाम एक जोश भरी वीर रस की कविता पढ़ कर रोंगटे खड़े हो गये ,बहुत प्रेरक कविता देश को एसए युवाओं की ज़रूरत है आज |


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 25, 2012 at 11:02am

//ढूढने से चित्र  मानचित्र में मिलेगा नहीं ,

जिद पे जो कोई देशभक्त अड़ जायेगा.. //
शैलेन्द्र जी बहुत ही खुबसूरत भावभिव्यक्ति , देश को ऐसे ही नवजवानों की जरुरत है, अच्छी रचना पर बधाई स्वीकार करें |
Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on February 25, 2012 at 11:01am

श्री सतीश सर जी उत्साहवर्धन के लिए व अपना आशीर्वाद प्रदान करने के लिए बहुत बहुत आभार .

Comment by satish mapatpuri on February 25, 2012 at 10:19am
क्या लड़ेंगे बैरियों से किसपे गुमान करें ,
छत जो बचा न पाए अपने मकान क़ी.
स्वार्थपरता क़ी सीढ़ियों पे जो कदम चलें,
कीमत लगाऊ मैं क्या उनके थकान  क़ी .
बीज विस्फोटकों का बेंच रहा सरेआम,
धज्जियाँ उड़ा दो ऐसे बारूदी दुकान क़ी .
हो न पाए अनुक्षय स्वाभिमान भारत का ,
आभा कम हो न पाए माँ के मुस्कान क़ी ..
आपकी भावना काबिले तारीफ़ है .......... बधाई शैलेन्द्र जी

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin posted a discussion

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)

आदरणीय साथियो,सादर नमन।."ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।प्रस्तुत…See More
14 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"इल्म गिरवी है अभी अपनी जहालत के लिए ढूँढ लो क़ौम नयी अब तो बग़ावत के लिए अब अगर नाक कटानी ही है हज़रत…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर सुंदर गजल हुई है। गिरह भी खूब लगाई है। हार्दिक बधाई।"
Sunday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"2122, 1122, 1122, 112/22 सर झुका देते हैं हम उसकी इबादत के लिए एक दिल चाहिए हमको तो मुहब्बत के…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सादर अभिवादन।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सर कोई जब न उठा सच की हिमायत के लिएकर्बला   साथ   चले   कौन …"
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
" स्वागतम "
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 190 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का मिसरा नौजवान शायर…See More
Apr 21
आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
Apr 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
Apr 19
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर आपने  दोहा छंद रचने का सुन्दर प्रयास किया है।…"
Apr 19
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  सही कहना है हम भारतीय और विशेषकर जो अभावों में पलकर बड़े हुए हैं, हर…"
Apr 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service