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हुईं थीं मुद्दतें फिर, वक़्त कुछ ख़ाली सा गुज़रा है;
कोई बीता हुआ मंज़र, ज़हन में आके ठहरा है;


कहीं जाऊं, मैं कुछ सोचूँ, न जाने क्या हुआ है,
मेरी आज़ाद यादों पर किस तसव्वुर का पहरा है;


वो आये तो ख़िज़ां में भी एक ख़ुशगवारी थी,
नहीं हैं वो तो मुझको इन बहारों में भी सेहरा है;


मुहब्बत की गहराई में डूबा इस क़दर यारों,
कोई दरिया-समंदर हो, लगता कम ही गहरा है;


हुई मय से जो तौबा यार वाइज़ बन गया था,
जो देखा जा के तो जाना वो, न सुधरा था न सुधरा है;


कभी ख़्वाबों में धुंधली सी कोई तस्वीर बनती है,
हुए उनसे मुख़ातिब जाना, यही हसीन चेहरा है;


थी जो गफ़लत मुझे के ये हक़ीक़त है हसीं कितनी;
खुली जो आँख पाया कोई, ख़्वाब सुनहरा है;


चले करने बयां अलफ़ाज़ में उन लम्हात को 'वाहिद',
समझ आया उन्हें ये शख़्स, अंधा-गूंगा-बहरा है;

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Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 15, 2012 at 10:33am

आपका हार्दिक आभार आदरणीया राजेश कुमारी जी| सादर,


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 15, 2012 at 8:23am

कहीं जाऊं, मैं कुछ सोचूँ, न जाने क्या हुआ है,
मेरी आज़ाद यादों पर किस तसव्वुर का पहरा है;....bahut achchi ghazal...vaah

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 14, 2012 at 12:24pm

आभार मनोज भाई आपका..

Comment by मनोज कुमार सिंह 'मयंक' on March 14, 2012 at 8:20am

हुई मय से जो तौबा यार वाइज़ बन गया था,
जो देखा जा के तो जाना वो, न सुधरा था न सुधरा है;....कुछ लोग कभी नहीं सुधारते वाहिद भाई....पूरी की पूरी गजल ही खूबसूरत है ..आगे क्या कहूँ ...शुक्रिया 

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 12, 2012 at 1:08pm

आदरणीय ब्रजभूषण जी,

प्रशंसा के लिए शुक्रगुज़ार हूँ आपका|

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 12, 2012 at 1:07pm

स्नेही मनोज भाई,

हृदयतल से आभार|

Comment by Brij bhushan choubey on March 12, 2012 at 12:13pm

चले करने बयां अलफ़ाज़ में उन लम्हात को 'वाहिद',
समझ आया उन्हें ये शख़्स, अंधा-गूंगा-बहरा है;

क्या बात है ! बहुत खूब |

Comment by मनोज कुमार सिंह 'मयंक' on March 12, 2012 at 8:34am

बहुत खूब वाहिद भाई...बहुत ही दिलकश नज्म है|कोटिशः बधाइयाँ

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 11, 2012 at 7:49pm

आदरणीय हबीब जी,

प्रशंसा के लिए तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ|

Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on March 11, 2012 at 5:57pm

खुबसूरत ग़ज़ल वाहिद जी... हर शेर उम्दा...

सादर बधाई कुबूल फरमाएं....

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