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गज़ल - फरियाद करने जा रहे हो

और किसको शाद करने जा रहे हो

क्यों  मुझे बरबाद करने जा रहे हो

 

बज्म में चर्चा मेरी बदनामियों का  

और  तुम इरशाद करने जा रहे हो

 

जो हकीकत थी सुनानी तुम उसे ही

अन- कही रूदाद करने  जा  रहे हो

 

जिस चमन में फूल नफरत के उगे हैं

तुम  उसे  आबाद करने  जा रहे हो

 

ठोकरों  से  चोट खाकर पत्थरों  के

द्वार  पर फरियाद  करने जा  रहे हो

 

 

..................................... अरुन श्री !

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Comment

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Comment by Arun Sri on March 30, 2012 at 10:25am

धन्यवाद साही सर !

Comment by Arun Sri on March 30, 2012 at 10:22am

धन्यवाद सीमा मैम ! आपका आशीर्वाद अपेक्षित रहेगा !

Comment by Arun Sri on March 30, 2012 at 10:21am

धन्यवाद संदीप सर ! दृष्टि बनाए रखें !

Comment by Arun Sri on March 30, 2012 at 10:20am

सहना के लिए धन्यवाद राकेश बस्तिवी  सर !

और अर्थ तो संदीप जी ने बता ही दिया !

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 26, 2012 at 3:07pm

आदरणीय अरुण जी,

बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल कही आपने! बेहतरीन अशआर से लबरेज़ आपकी ये ग़ज़ल बहुत पसंद आई| सादर,

***************

भाई राकेश जी,

रूदाद का अर्थ है - माजरा, वृत्तान्त या समाचार| :-))

Comment by राकेश त्रिपाठी 'बस्तीवी' on March 26, 2012 at 12:29pm

वह! बहुत खूब. कृपया रूदाद का अर्थ बताएं. धन्यवाद.

Comment by Arun Sri on March 26, 2012 at 10:58am

महिमा जी , आपकी स्नेहिल बधाई स्वीकार ! और हार्दिक धन्यवाद !

Comment by Arun Sri on March 26, 2012 at 10:57am

नीरजा मैम ! सराहना हेतु धन्यवाद !

Comment by Arun Sri on March 26, 2012 at 10:56am

प्रदीप कुशवाहा सर ! धन्यवाद !

Comment by Arun Sri on March 26, 2012 at 10:55am

आदरणीय सौरभ सर , पुनः आभारी हूँ आपका ! मैं परिवर्तन करने का प्रयत्न करता हूँ ! पुनः आपका मार्गदर्शन चाहूँगा ! धन्यवाद !

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