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राकेश त्रिपाठी 'बस्तीवी'
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राकेश त्रिपाठी 'बस्तीवी''s Page

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
Allahabaad
Profession
Engineer
About me
राख सा दिखता हूँ, कभी आग बन जाऊंगा. टूटा हुआ सितार हूँ, कभी साज बन जाऊंगा. कलम टूटने के बाद स्याही बिखर जाती है, चुपचाप लिखता हूँ आज, कभी आवाज बन जाऊंगा.

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राकेश त्रिपाठी 'बस्तीवी''s Blog

माँ का प्यार (लघु-कथा)

माँ मुझे बचपन में मेरी उम्र के हिसाब से कुछ ज्यादा ही रोटियां दिया करती थीं. इंटरवल में सारे बच्चे जल्दी जल्दी खाना ख़त्म करके खेलने चले जाते थे. और मै अपना खाना ख़त्म नहीं कर पता था. तो डब्बे में हमेशा ही कुछ न कुछ बच जाता था, और मुझे रोज़ डांट पड़ती थी. मेरी बहन भी घर आ के शिकायत करती थी कि उसे छोड़ के इंटरवल में मै खेलने भाग जाता हूँ.

.

एक दिन मेरी बहन मेरे साथ स्कूल नहीं गई. मै ख़ुशी ख़ुशी घर आया और माँ को बताया की मैंने आज पूरा खाना खाया है. माँ को यकीन नहीं हुआ, उन्होंने…

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Posted on April 20, 2012 at 4:00pm — 20 Comments

मै भी लड़ना चाहती हूँ!

मै भी लड़ना चाहती हूँ! मुझे लड़ने दो!

हार का मै स्वाद चखना चाहती हूँ.

जीत का अभ्यास करना चाहती हूँ.

.

प्रेयसी बन बन के हो गई हूँ बोर!

मै नए किरदार बनना चाहती हूँ.

मै भी जिम्मेदार बनना चाहती हूँ.

.

सीता-गीता मेरे अब नाम मत रखो!

धनुष का मै तीर बनाना चाहती हूँ,

गरल पीकर रूद्र बनना चाहती हूँ.

.

अपने पास ही रखो हमदर्दी अपनी!

खड़े होकर सफ़र करना चाहती हूँ,

'बसो' का मै ड्राइवर बनना चाहती हूँ.

मै…

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Posted on April 12, 2012 at 11:03am — 10 Comments

हम पंछी एक डाल के

हम पंछी एक डाल के

Disclaimer:यह कहानी किसी भी धर्म या जाती को उंचा या नीचा दिखाने के लिए नहीं लिखी है, यह बस विषम परिस्थितियों में मानवी भूलों एवं संदेहों को उजागर करने के उद्देश्य से लिखा है. धन्यवाद.…

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Posted on April 6, 2012 at 10:00am — 19 Comments

सीधा लड़का

मेरे बचपन के एक मित्र के बड़े भैया पढ़ने में बड़े तेज़ थे, और पूरे मोहल्ले में अपनी आज्ञाकारिता और गंभीरता के लिए प्रसिद्ध थे. भैया हम लोगो से करीब 5 साल बड़े थे तो हमारे लिए उनका व्यक्तित्व एक मिसाल था, और जब भी हमारी बदमाशियो के कारण खिचाई होती थी तो उनका उदहारण सामने जरूर लाया जाता था.  सभी माएं अपने बच्चो से कहती थी की कितना 'सीधा लड़का' है. माँ बाप की हर बात मानता है. कभी उसे भी पिक्चर जाते हुए देखा है?

मेधावी तो थे ही, एक बार में ही रूरकी विश्वविद्यालय में इन्जिनेअरिंग में…

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Posted on April 2, 2012 at 12:30pm — 18 Comments

Comment Wall (10 comments)

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At 3:05pm on December 7, 2012, Admin said…

अंतिम स्मार पत्र 
प्रिय सदस्य, अंतिम रूप से स्मारित करते हुए कहना है कि पूर्व में स्मारित करने के पश्चात भी आप का पत्राचार का पता एवं नाम (चेक / ड्राफ्ट निर्गत करने हेतु ) अभी तक अप्राप्त है, जिसके कारण प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार राशि नहीं भेजा जा सका है, कृपया दिनांक 15 दिसंबर -12 तक उक्त विवरण admin@openbooksonline.com पर अवश्य उपलब्ध कराये जिससे अग्रेतर कार्रवाही कि जा सके | ध्यान रहे मेल उसी इ-मेल आई डी से भेजे जिस आई डी से आपने अपना ओ बी ओ प्रोफाइल बनाया है | यदि उक्त तिथि तक आपका प्रतिउत्तर अप्राप्त रहता है तो पुरस्कार राशि व प्रमाण पत्र भेजना संभव नहीं होगा और भविष्य में आपका दावा अमान्य होगा ।
सादर 
एडमिन 
ओपन बुक्स ऑनलाइन डाट कॉम

At 12:44pm on October 3, 2012, Admin said…

प्रिय सदस्य / सदस्या

आप का पत्राचार का पता एवं नाम (चेक / ड्राफ्ट निर्गत करने हेतु ) अभी तक अप्राप्त है, जिसके कारण प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार राशि नहीं भेजे जा सके है, कृपया शीघ्र उक्त विवरण admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराये जिससे अग्रेतर कार्रवाही कि जा सके | ध्यान रहे मेल उसी इ-मेल आई डी से भेजे जिस आई डी से आपने अपना ओ बी ओ प्रोफाइल बनाया है |
सादर 
एडमिन 
ओपन बुक्स ऑनलाइन डाट कॉम 
At 1:18pm on April 2, 2012, अरुण कान्त शुक्ला said…

राकेश भाई विधा की इस धरती पर नया हूँ , प्रेम बनाए रखियेगा .

At 12:46pm on April 1, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

स्नेही  , श्री राकेश  जी.

शुभाशीष.
ये सब आपकी मेहनत का प्रतिफल है. आप मेरा नाम रोशन कर रहे हैं.
शांति मिल रही है. 
धन्यवाद.  स्नेह बनाये रखियेगा.
At 7:03am on March 17, 2012, Mukesh Kumar Saxena said…
Rakesh ji meri kavita padne ke liye dhanybad
At 6:10am on March 15, 2012, JAWAHAR LAL SINGH said…

आदरणीय राकेश जी, आप सब लोग यहाँ आकार एक से एक जलवा बिखेर रहे हैं! बधाई!

At 3:33pm on March 14, 2012, MAHIMA SHREE said…
राकेश जी ,
नए उपनाम की बधाई .....अच्छी सोच है....और आपके नाम के साथ जच भी रही है
At 11:12am on March 2, 2012, MAHIMA SHREE said…
राकेश जी,
नमस्कार...आभारी हू..
At 4:05pm on March 1, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

aaiye milke nayee dunia banayen, dhanyvaad

At 8:20am on March 1, 2012, Admin said…

 
 
 

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