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एक अक्षर का एक शब्द ये, कैसे करे हम इसका गान;
सूरज चाँद सितारों से भी बढ़कर रहता जिसका मान|
वन उपवन ये झरनें नदियाँ दे न पते इतना सुख;
एक पल में ही दे देती है माँ वो सुख जितना महान||

माँ न हो तो किसी चीज की कोई भी कल्पना कैसी;
इसके बिना तो जग झूठा है, झूठी है हम सबकी शान|
एक अक्षर का एक शब्द.....................................

सुख हो या दुःख सबमे रखती है अपने बच्चों को खुश;
सब कुछ सहती पर रखती है नित्य प्रति बच्चों का ध्यान |
एक अक्षर का एक शब्द......................................

लाडले की खुशियों खातिर सर पे बोझ उठाती है;
बच्चों के दोषों को छिपाती, बन जाती जो खुद अन्जान|
एक अक्षर का एक शब्द.....................................

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Comment

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Comment by आशीष यादव on May 13, 2012 at 1:48pm
माँ को समर्पित रचना पर आप लोगो बधाईयोँ पर देर से धन्यवाद देने के लिए क्षमा प्रार्थी हुँ।
धन्यवाद
Comment by Akshay Thakur " परब्रह्म " on January 21, 2011 at 10:15pm
Badiya aashish Ji.. Bahut badiya
Comment by jitender kumaar on September 18, 2010 at 10:09pm
बहुत ही अच्छा लिखे हो| लिखते रहो |

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 18, 2010 at 3:37pm
माँ से सुन्दर शब्द आज तक दुनिया मे बना ही नहीं, बहुत ही सुंदर रचना है आशीष भाई, लगे रहिये direction सही है ,जय हो,
Comment by baban pandey on September 18, 2010 at 11:16am
एक अक्षर माँ का बहुत ही sakun deta है ...saari sristi isi शब्द में chhipi है badhaii

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