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कुछ समय में यहाँ से चले जायेंगे,
इक नयी ज़िन्दगी को फिर अपनाएंगे|
याद आएगा कुछ, कुछ भूलेगा नहीं,
बाँध यादों की गठरी को ले जायेंगे|

क्या पता होगा अपना ठिकाना कहाँ,
क्या करें तय की हमको है जाना कहाँ|
मंजिल सामने होके आवाज देगी,
वक़्त के रास्ते हमको आजमाएंगे|
कुछ समय में .......................

तब तमाम ऑफिस के छोड़ कर मामले,
जी होगा साथ दोस्तों के कॉलेज चलें|
तब न होंगे ये दिन, ये समय, ये घडी,
गर होंगे तो ये दिन ही नज़र आयेंगे|
कुछ समय में................................

जी करेगा चलो आज बंक मार लें,
दूसरों का असाइनमेंट उतार लें|
चाह कर भी न कर पायेंगे ये कभी,
दबा कर के तमन्ना घुटे जायेंगे|
कुछ समय में यहाँ से चले जायेंगे,
.................................................

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Comment

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Comment by आशीष यादव on December 7, 2010 at 6:57am
आप logon को मेरी यह रचना पसंद आई, बहुत-बहुत धन्यवाद
Comment by Anupama on December 4, 2010 at 12:45am
समय बीत जाता है...
यादें रह जाती हैं!
सुन्दर !
Comment by baban pandey on November 29, 2010 at 1:21pm
जीवंत वर्णन
Comment by Lata R.Ojha on November 28, 2010 at 1:19pm
सच है ..साथ तो बस यादों की गठरी ही जाती है..और मज़ा ये की दे कर भी जाते हैं यादों की गठरी ही..बहुत सुंदर रचना है :)
Comment by Ajay Singh on November 26, 2010 at 9:46pm
जी करेगा चलो आज बंक मार लें,
दूसरों का असाइनमेंट उतार लें|
bhai last sem ki tarah is semester me to doosron k assignment se kam nhi chalega,tumne ek bar fir last sem ki yade taja kar di
veryy,,,,,,Good .. . .
Comment by Raju on November 26, 2010 at 3:41pm
hum jaise last year wale students ke liye bahut hi badhiya rachna
Comment by Dr.Brijesh Kumar Tripathi on November 25, 2010 at 8:55pm
तब तमाम ऑफिस के छोड़ कर मामले,
जी होगा साथ दोस्तों के कॉलेज चलें|
तब न होंगे ये दिन, ये समय, ये घडी,
गर होंगे तो ये दिन ही नज़र आयेंगे|
कुछ समय में................................

जी करेगा चलो आज बंक मार लें,
दूसरों का असाइनमेंट उतार लें|
चाह कर भी न कर पायेंगे ये कभी,
दबा कर के तमन्ना घुटे जायेंगे|
कुछ समय में यहाँ से चले जायेंगे,
.................................................
बहुत बढ़िया आशीष जी ...सबको जाना है यादों की गठरी साथ ले कर ..बहुत कुछ छूटेगा लेकिन मिलेगा भी बहुतकुछ ..कुछ उस पर भी लिखिए ...बढ़िया लिखते रहिये अच्छा लगता है
Comment by GOPAL BAGHEL 'MADHU' on November 25, 2010 at 1:40am
Bahut acchii hae
Comment by Julie on November 25, 2010 at 12:52am
waah... aapki rachna nein to poorane din yaad dila diya... bahut hi sunder... Badhaai...!!
Comment by आशीष यादव on September 29, 2010 at 10:45pm
Thank you BAGI JI. Bs aap log sneh bna k rakhe.

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