For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लायेगा अब कौन सुराज

आजाद था भारत पहले से कब गुलामी की  बेड़ियों में जकड़ा था 
सोच हमारी थी गलत फिर भी  न बदली  इसी बात का  रगडा था 
था सोने की चिड़िया भारत देश कहते अब भी है  इनकार नहीं 
पहले था  लूटा विदेशियों ने अब लूटते  वो जिनके घर बार यहीं 
हमेशा पूजा लुटेरों को निज स्वारथ घर भेदी बन सत्कार किया 
जो बढ़ा रोकने आततताईयों को पग पग पर उसका अपमान किया 
दिया मान सम्मान उन्हें बहुत घर अस्मत को मिलकर  लुटवाया
बढे वीर बाँकुरे रोकने जब कर घात विदेशियों को महान बनाया 
सिकंदर अकबर क्यों हुए महान गाते गीतों में क्यों  लुटेरो की कहानी 
पुरु वीर शिवा  मंगल पाण्डेय आजाद भगत वीर सुभाष  सच्चे बलिदानी 
कैसे कह दें कि आजाद हैं हम अपने बलिदानी तक  जिन्हें  हैं याद नहीं 
लायेगा अब कौन सुराज ऐसे रहनुमाओं से करेगा कोई फरियाद नहीं 

Views: 801

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Santosh Kumar Singh on April 13, 2012 at 5:01pm

मनीषी जी ,सादर नमस्ते 

बहुत ही अच्छी रचना ,..बहुत बधाई 

Comment by RAJEEV KUMAR JHA on April 12, 2012 at 3:50pm

बहुत अच्छी कविता,मानिषी जी.

कैसे कह दें कि आजाद हैं हम अपने बलिदानी तक जिन्हें  हैं याद नहीं
लायेगा अब कौन सुराज ऐसे रहनुमाओं से करेगा कोई फरियाद नहीं
सुन्दर पंक्तियाँ.
Comment by MAHIMA SHREE on April 11, 2012 at 4:01pm
पहले था लूटा विदेशियों ने अब लूटते वो जिनके घर बार यहीं
हमेशा पूजा लुटेरों को निज स्वारथ घर भेदी बन सत्कार किया
आदरणीय मनीषी जी
स्वागत है , अच्छी प्रस्तुति ..भाव बहुत ही अच्छे है...बधाई स्वीकार करें
Comment by AVINASH S BAGDE on April 11, 2012 at 3:12pm

सम्मान मिला था उसको तो, अस्मत जिसने है लुटवाया

वीर बाँकुरे रहे उपेक्षित, मान लुटेरों को दिलवाया  

बाबर-अकबर कितने महान, सच है उनकी लूट-कहानी 

“पुरु” ‘वीर’ ‘शिवा’ ‘मंगल’ ‘सुभाष’, ‘आजाद’ ‘भगत’ थे बलिदानी ...Manishi ji aapke bhao ko aadarniy Ambarish ji ne sunder set-up diya hai....nishchit tour pe ek achchha prayas....

Ambarish ji Yograj ji,Vinas Kesari ji,Ganesh ji Bagi Dharmendr Sharma ya Saurabh Pande ji ka marg-darshan aapke lekhan ko nai unchaiya de sakta hai....

Comment by Arun Sri on April 11, 2012 at 11:09am

सुन्दर भावों से सजी समसामयिक रचना !

Comment by अश्विनी कुमार on April 11, 2012 at 8:03am

MANISHI SINGH जी अति सुंदर भावभिव्यक्ति ,,बाकी सुधी जनों के निर्देशन मे शिल्प भी निखर उठेगा अच्छी कृति के लिए हार्दिक बधाई ...

Comment by satish mapatpuri on April 11, 2012 at 12:46am

सुन्दर प्रयास , बधाई मनीषी जी

Comment by Er. Ambarish Srivastava on April 11, 2012 at 12:42am

मनीषी जी, आपकी रचना के भाव अति उत्तम हैं ! हार्दिक बधाई!

ओबीओ पर आकर बस इसी तरह से अभ्यास करती रहें ....जिससे लय, तुक, मात्रा, गेयता, यति, व प्रवाह इत्यादि स्वयं ही सधते जायेंगें | परिणामस्वरूप रचनाएँ दिन-प्रतिदिन निखरती ही जायेंगी|

उदाहरण के लिए आपकी उपरोक्त रचना को ही वांछित शिल्प में ढालने का  प्रयास किया गया है !

 

आजाद था भारत पहले से, कब इस बेड़ी में जकड़ा था 

गलत सोच बदली ना हमने, सो इसी बात का  रगड़ा था 

था सोने की चिड़िया भारत, कहते अब भी इनकार नहीं 

पहले था लुटा विदेशी से, अब लूटें अपने लोग यहीं

पूजा नित नए लुटेरों को, निज स्वार्थ जगे सत्कार किया 

जो बढ़े रोकने उन सबको, पग-पग उनका अपमान किया 

सम्मान मिला था उसको तो, अस्मत जिसने है लुटवाया

वीर बाँकुरे रहे उपेक्षित, मान लुटेरों को दिलवाया  

बाबर-अकबर कितने महान, सच है उनकी लूट-कहानी 

“पुरु” ‘वीर’ ‘शिवा’ ‘मंगल’ ‘सुभाष’, ‘आजाद’ ‘भगत’ थे बलिदानी 

कैसे कह दें आजाद कहाँ, जो बलिदानी तक याद नहीं 

लायेगा कौन सुराज यहाँ, इनसे कोई फरियाद नहीं

Comment by वीनस केसरी on April 11, 2012 at 12:17am

सुन्दर भावाभिव्यक्ति

Comment by Rita Singh 'Sarjana" on April 10, 2012 at 10:46pm

priy manishi ji sundar bhav liye rachna ke liye badhai.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
18 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
18 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
yesterday
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
yesterday
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
Thursday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service