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लायेगा अब कौन सुराज

आजाद था भारत पहले से कब गुलामी की  बेड़ियों में जकड़ा था 
सोच हमारी थी गलत फिर भी  न बदली  इसी बात का  रगडा था 
था सोने की चिड़िया भारत देश कहते अब भी है  इनकार नहीं 
पहले था  लूटा विदेशियों ने अब लूटते  वो जिनके घर बार यहीं 
हमेशा पूजा लुटेरों को निज स्वारथ घर भेदी बन सत्कार किया 
जो बढ़ा रोकने आततताईयों को पग पग पर उसका अपमान किया 
दिया मान सम्मान उन्हें बहुत घर अस्मत को मिलकर  लुटवाया
बढे वीर बाँकुरे रोकने जब कर घात विदेशियों को महान बनाया 
सिकंदर अकबर क्यों हुए महान गाते गीतों में क्यों  लुटेरो की कहानी 
पुरु वीर शिवा  मंगल पाण्डेय आजाद भगत वीर सुभाष  सच्चे बलिदानी 
कैसे कह दें कि आजाद हैं हम अपने बलिदानी तक  जिन्हें  हैं याद नहीं 
लायेगा अब कौन सुराज ऐसे रहनुमाओं से करेगा कोई फरियाद नहीं 

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Comment by Santosh Kumar Singh on April 13, 2012 at 5:01pm

मनीषी जी ,सादर नमस्ते 

बहुत ही अच्छी रचना ,..बहुत बधाई 

Comment by RAJEEV KUMAR JHA on April 12, 2012 at 3:50pm

बहुत अच्छी कविता,मानिषी जी.

कैसे कह दें कि आजाद हैं हम अपने बलिदानी तक जिन्हें  हैं याद नहीं
लायेगा अब कौन सुराज ऐसे रहनुमाओं से करेगा कोई फरियाद नहीं
सुन्दर पंक्तियाँ.
Comment by MAHIMA SHREE on April 11, 2012 at 4:01pm
पहले था लूटा विदेशियों ने अब लूटते वो जिनके घर बार यहीं
हमेशा पूजा लुटेरों को निज स्वारथ घर भेदी बन सत्कार किया
आदरणीय मनीषी जी
स्वागत है , अच्छी प्रस्तुति ..भाव बहुत ही अच्छे है...बधाई स्वीकार करें
Comment by AVINASH S BAGDE on April 11, 2012 at 3:12pm

सम्मान मिला था उसको तो, अस्मत जिसने है लुटवाया

वीर बाँकुरे रहे उपेक्षित, मान लुटेरों को दिलवाया  

बाबर-अकबर कितने महान, सच है उनकी लूट-कहानी 

“पुरु” ‘वीर’ ‘शिवा’ ‘मंगल’ ‘सुभाष’, ‘आजाद’ ‘भगत’ थे बलिदानी ...Manishi ji aapke bhao ko aadarniy Ambarish ji ne sunder set-up diya hai....nishchit tour pe ek achchha prayas....

Ambarish ji Yograj ji,Vinas Kesari ji,Ganesh ji Bagi Dharmendr Sharma ya Saurabh Pande ji ka marg-darshan aapke lekhan ko nai unchaiya de sakta hai....

Comment by Arun Sri on April 11, 2012 at 11:09am

सुन्दर भावों से सजी समसामयिक रचना !

Comment by अश्विनी कुमार on April 11, 2012 at 8:03am

MANISHI SINGH जी अति सुंदर भावभिव्यक्ति ,,बाकी सुधी जनों के निर्देशन मे शिल्प भी निखर उठेगा अच्छी कृति के लिए हार्दिक बधाई ...

Comment by satish mapatpuri on April 11, 2012 at 12:46am

सुन्दर प्रयास , बधाई मनीषी जी

Comment by Er. Ambarish Srivastava on April 11, 2012 at 12:42am

मनीषी जी, आपकी रचना के भाव अति उत्तम हैं ! हार्दिक बधाई!

ओबीओ पर आकर बस इसी तरह से अभ्यास करती रहें ....जिससे लय, तुक, मात्रा, गेयता, यति, व प्रवाह इत्यादि स्वयं ही सधते जायेंगें | परिणामस्वरूप रचनाएँ दिन-प्रतिदिन निखरती ही जायेंगी|

उदाहरण के लिए आपकी उपरोक्त रचना को ही वांछित शिल्प में ढालने का  प्रयास किया गया है !

 

आजाद था भारत पहले से, कब इस बेड़ी में जकड़ा था 

गलत सोच बदली ना हमने, सो इसी बात का  रगड़ा था 

था सोने की चिड़िया भारत, कहते अब भी इनकार नहीं 

पहले था लुटा विदेशी से, अब लूटें अपने लोग यहीं

पूजा नित नए लुटेरों को, निज स्वार्थ जगे सत्कार किया 

जो बढ़े रोकने उन सबको, पग-पग उनका अपमान किया 

सम्मान मिला था उसको तो, अस्मत जिसने है लुटवाया

वीर बाँकुरे रहे उपेक्षित, मान लुटेरों को दिलवाया  

बाबर-अकबर कितने महान, सच है उनकी लूट-कहानी 

“पुरु” ‘वीर’ ‘शिवा’ ‘मंगल’ ‘सुभाष’, ‘आजाद’ ‘भगत’ थे बलिदानी 

कैसे कह दें आजाद कहाँ, जो बलिदानी तक याद नहीं 

लायेगा कौन सुराज यहाँ, इनसे कोई फरियाद नहीं

Comment by वीनस केसरी on April 11, 2012 at 12:17am

सुन्दर भावाभिव्यक्ति

Comment by Rita Singh 'Sarjana" on April 10, 2012 at 10:46pm

priy manishi ji sundar bhav liye rachna ke liye badhai.

कृपया ध्यान दे...

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