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ज़िन्दगी ज़िन्दगी हो गयी ......

बात उनसे कभी हो गयी
ज़िन्दगी ज़िन्दगी हो गयी

दिल्लगी आशिकी हो गयी
आशिकी बंदगी हो गयी

वो तसव्वुर में क्या आ गए
क़ल्ब में रौशनी हो गयी

जब कभी उनसे नज़रें मिली
अपनी तो मैकशी हो गयी

बात फिर से जो होनी न थी
बात फिर से वो ही हो गयी

जब कभी वो खफा हो गए
ख़त्म सारी ख़ुशी हो गयी

बादलो क जब आंसू गिरे
कुल जहाँ में नमी हो गयी

सैकड़ो घोंसले गिर गए
क्यों हवा सरफिरी हो गयी

ध्यान उनका जब आया 'हिलाल '
गुफ्तगू शायरी हो गयी

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Comment

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Comment by Hilal Badayuni on September 27, 2010 at 8:10pm
aap sabhi jo muhabbato se nawaazte hai sabhi ka bahut bahut shukiya
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on September 23, 2010 at 9:24pm
बात उनसे कभी हो गयी
ज़िन्दगी ज़िन्दगी हो गयी

दिल्लगी आशिकी हो गयी
आशिकी बंदगी हो गयी

भाई हिलाल जी....क्या टिपण्णी किया जाये कुछ समझ में नहीं आ रहा है.....कुछ टिपण्णी लिखने लायक आपने छोड़ा ही नहीं है...सब तो आपने ही लिख डाला है....प्यार से भरपूर इस ग़ज़ल के लिए बस इतना ही कहूँगा की बहुत ही बढ़िया लिखा है है आपने.....शुभकामना है आपको.....
ऐसेही लिखते रहे....
Comment by rajni chhabra on September 23, 2010 at 1:08am
pyar se sarobar gazal ke liye badhai sweekaren
Comment by Subodh kumar on September 22, 2010 at 4:56pm
bahut khub...

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 21, 2010 at 10:44pm
बहुत ही खुबसूरत ग़ज़ल कही है हिलाल भाई, ख्यालात भी काफी अच्छे है, हुस्ने मतला का प्रयोग अच्छा लगा, सब मिलाकर एक शानदार ग़ज़ल कह गये आप, बधाई स्वीकार करे, धन्यवाद,

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