For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")



नम आँखें...
आँखों में इंतज़ार...
कभी घड़ी को तकती...
तो कभी दरवाज़े की चौखट को...
और कभी थाली में सजी रेशम की डोर को...
उसमें सजे मोतियों की चमक में दिखता तेरा मुस्कुराता चेहरा...
और खो जाती मैं उस सुन्हेरे बचपन में...
जहाँ हर पल तेरा मुझे छेड़ना...
मुझे चिढ़ाना और चोटी खींचना...
तब भी आंसू देता था और आज भी...

तेरा शैतानियाँ करना और मेरा उन्हें माँ से छुपाना...
मुझे कोई रुलाये तो तेरा ज्वालामुखी बन जाना...
वो पेड़ से अमरुद तोड़ना...
वो गन्नें के खेतों में चोरी करना...
वो कच्चे आम का अचार...
वो स्कूल ना जाने पर बाबा की मार...
सब हैं आज भी वैसे...
पर सिर्फ, यादों में...
बदले तो तुम, भईया...

पेट पालने हमारा... शहर जाना तुम्हारा...
और फिर मनीआर्डर तक ही सिमट जाना रिश्ता हमारा...
हर बरस राखी पर मेरा शाम तक,
यूँही तेरी राह तकना...
और फिर डाकिया चाचा का,
तुम्हारा बहानों भरा तार दे जाना...
बस,
अब यही तो बचा था राखी का त्यौहार, भईया...!!

::::जूली मुलानी::::
::::Julie Mulani::::

Views: 471

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Julie on September 23, 2010 at 7:46pm
शुक्रिया अपर्णा जी... दोस्त बनाने का और मेरी रचना को पसंद करने का...!! :-)
Comment by Julie on September 23, 2010 at 7:46pm
'बागी जी' बहुत बहुत शुक्रिया... आपकी वाह-वाही का...!! :-)
Comment by Aparna Bhatnagar on September 23, 2010 at 2:52pm
bhaav pradhan kavita hai Julie..

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 23, 2010 at 10:04am
अच्छी रचना है जुली जी, भाई बहन की पवित्र रिश्ता और उसपर यह खुबसूरत रचना वाह वाह करने पर मजबूर करती है |
Comment by Julie on September 23, 2010 at 12:09am
शुक्रिया नवीन जी...!! :-)

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari and आशीष यादव are now friends
13 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
13 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
13 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
18 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
18 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
20 hours ago
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
23 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
yesterday
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
yesterday
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
yesterday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .अधर
"वाह। "
yesterday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .विविध
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत बढ़िया दोहों की रचना हुई है।  बधाई स्वीकार कीजिए।"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service