For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Aparna Bhatnagar
  • Female
  • Ahmedabad
  • India
Share on Facebook MySpace

Aparna Bhatnagar's Friends

  • manu manju shukla
  • vimla bhandari
  • Sudhir Sharma
  • Ravindra Prabhat
  • Veerendra Jain
  • DEEP ZIRVI
  • Anupama
  • moin shamsi
  • Madhuram Chaturvedi
  • Jaya Pathak Srinivasan
  • Rajesh srivastava
  • jitender kumaar
  • राज लाली बटाला
  • Hilal Badayuni
  • Mamta Mujumdar

Aparna Bhatnagar's Groups

 

Aparna Bhatnagar's Page

Profile Information

City State
Ahmedabad Gujarat
Native Place
Jaipur
Profession
Home maker
About me
A reader and have interest to write poetry and stories. I love to play table tennis.

Aparna Bhatnagar's Blog

मिनौती





(हर नारी मिनौती है .. यहाँ दृश्य अरुणाचल का है , इसलिए बांस, धान , सूरज , सीतापुष्प , पहाड़ के बिम्ब भी उसी प्रदेश के हैं. बरई, न्यिओगा वहाँ के लोक जीवन से जुड़े गीत हैं - जैसे हम बन्ना- बन्नी , आला , बिरहा से जुड़े हैं ... इस संगीत को बांसों से जोड़ा है .. जैसे बांस के खोखल से निसृत होकर ये मिनौती की आत्मा में पैठ गए हैं ... नारी के मन और आत्म को समझाते हुए पुरुष से अंतिम प्रश्न पर कविता समाप्त होती है ...)

मेरे बांस



पहचानते… Continue

Posted on October 16, 2010 at 5:00pm — 6 Comments

सब भर जाएगा



सब भर जाएगा !





रॉबिन तुम एकदम रॉबिन चिड़िया जैसे हो



छल्लेदार बाल , अकसर लाल रहने वाली दो गोल बड़ी आँखें



कभी उंघते नहीं देखा तुम्हे



माँ को कभी उठाना नहीं पड़ता



मुर्गे की एक सरल बांग पर उमड़ जाती है सुबह



और तुम नंगे पैर ही दौड़ जाते हो सागर के अंचल पर



अंतहीन बढ़ते कदम



रेत पर छापती चलती हैं नन्ही इच्छाओं के पैर



तुम चलते कहाँ… Continue

Posted on October 7, 2010 at 7:00am — 4 Comments

गौतम की प्रतीक्षा ?

कुछ तितलियाँ



फूलों की तलहटी में तैरती



कपड़े की गुथी गुड़ियाँ



कपास की धुनी बर्फ



उड़ते बिनौले



और पीछे भागता बचपन



मिट्टी की सौंध में रमी लाल बीर बहूटियाँ



मेमनों के गले में झूलते हाथ



नदी की छार से बीन-बीन कर गीतों को उछालता सरल नेह



सूखे पत्तों की खड़-खड़ में



अचानक बसंत की लुका-छिपी



और फिर बसंत -सा ही बड़ा हो जाना -



तब दीखना… Continue

Posted on October 4, 2010 at 5:00pm — 10 Comments

माही बह रही थी

माही नदी के पानी पर ढाक के पेड़ों की सुनहरी काली छाया , चांदी का वरक लपेटे बहता प्रवाह और किनारे की बजरी पर उगी नरम घास अनारो के कबीलाई मन के संस्कार बन चुके थे. उसका बचपन यहीं रेत में लोट-लोटकर उजला हुआ था. घंटों नदी के पानी में पैर डालकर बैठी रहती.छोटे-छोटे हाथ अंजुरी में पानी समेटते और हवा में कुछ बूंदें यूँ ही उछल जातीं. अनारो उन्हें लपकने की कोशिश करती और जब एक-आध बूंद उसके श्याम मुख पर गिरती तो खनखनाकर ऐसे हंसती कि सारा वातावरण उसकी हंसी से… Continue

Posted on October 1, 2010 at 7:30am — 6 Comments

Comment Wall (9 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 6:40pm on June 20, 2011, Sanjay Rajendraprasad Yadav said…
At 7:45pm on September 23, 2010, Julie said…


अपनी दोस्ती से नवाजने का बहुत बहुत शुक्रिया 'अपर्णा जी'...!! -जूली :-)
At 8:51pm on September 19, 2010,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…
स्वागतम्
=======
इस जगत में आए.. अच्छा किए
रहे अलम जगाए .. अच्छा किए । ..
At 2:19am on September 19, 2010, guddo dadi said…
अपर्णा बिटिया
सदा सुखी रहो
आपका निमंत्रण स्वीकार्य है
मेरा कोई ब्लॉग नहीं और ना ही लिखती हूँ
और मुझे हिंदी भी कम आती है
आशीर्वाद के साथ आपकी
गुड्डोदादी चिकागो अमेरिका से \
At 12:09am on September 19, 2010,
सदस्य टीम प्रबंधन
Rana Pratap Singh
said…

At 8:28pm on September 18, 2010, आशीष यादव said…
thankyou for add me as your freind
At 6:57pm on September 17, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 5:14pm on September 17, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

At 5:04pm on September 17, 2010, Admin said…

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari posted a blog post

गर्भनाल कब कट पाती है किसी की

कहीं भी कोई भी माँ अमर तो नहीं होती एक दिन जाना होता ही है सब की माताओ को फिर भी जानते बूझते भी…See More
7 hours ago
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"भाई सुशील जी, सारे दोहे जीवन के यथार्थ में डूबे हुए हैं.. हार्दिक बधाई।"
11 hours ago
vijay nikore posted a blog post

प्यार का पतझड़

एक दूसरे में आश्रय खोजतेभावनात्मक अवरोधों के दबाव मेंकभी ऐसा भी तो होता है ...समय समय से रूठ जाता…See More
18 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Apr 8
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Apr 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Apr 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service