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यादें बस यादें उनकी

हम जब उनको दिल स भुलाने लगते है
और ज्यादा वोह याद आने लगते है

मुझे न जाने क्या क्या कह देते है वोह
मैं कुछ कह दूं तो वो शर्माने लगते है

दिल में किसी के बस जाना आसान नहीं
काम कठिन है इस में ज़माने लगते है

याद तेरी आ जाती है तब काम बहुत
हम जब मुश्किल में घबराने लगते है

आज कोई "अलीम" स चुपके स बोला
आप मुझे जाने पहचाने लगते है .....

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Comment by Surkhab Bashar on October 26, 2018 at 11:33pm

मतल'अ का सानी मिस् रा यूं कर ले तो केसा है

और ज़्याद याद वो आने लगते हैं

वेसे अच्छी ग़ज़ल हुई है

Comment by Admin on April 20, 2010 at 5:10pm
फिर से एक अच्छी रचना पढने को मिला, बहुत बढ़िया है, शुक्रिया ,

याद तेरी आ जाती है तब काम बहुत
हम जब मुश्किल में घबराने लगते है
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on April 19, 2010 at 10:59pm
bahut badhiay aleem jee....
मुझे न जाने क्या क्या कह देते है वोह
मैं कुछ कह दूं तो वो शर्माने लगते है
bahut behtareen hai aapki ye rachna...aage bhi aapki aisi rachnaon ka intezaar rahega....
Comment by aleem azmi on April 19, 2010 at 10:46pm
bahut bahut shukriya ganesh bhai...hausala afzai liyee

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 19, 2010 at 10:29pm
अलीम जी ये प्रस्तुति भी पहले की तरह काफी खुबसूरत बनी है, आप के लेखनी मे जो गहराई है उसे दिल से महशुश किया जा सकता है,एक और लाजवाब रचना हम लोगो के सामने आया है,तहे दिल से शुक्रिया ,
मै तो बस इतना ही कहूगा की,
आप चंद दिनों मे ही अपनो सा लगने लगे,
नहीं तो यहाँ किसी को जानने मे जमाने लगते है,

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