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कोशिशों के समंदर से कामयाबी के मोती ढून्ढ लायेंगे 

हौसले की पतवार से कठिनाइयों का दरिया पार कर जायेंगे 
लक्ष्य के बादल को अपनी प्रतिभा के तीर से ऐसे चीर जायेंगे 
वर्षा के सामान हमारे गुण हर दिशा में बरस जायेंगे 

हिमालय की चोटियों की  तरह  ऋतू में शीतल  रहेंगे
क्रोध अहंकार और लालच को कभी नहीं अपनाएंगे 
सरिता के जल के  सामान हमेशा प्रयत्नरत  रहेंगे
किसी भी बाधा के आ जाने पर हम नहीं रुकेंगे 
आत्मविश्वास की मशाल से निराशा रूपी अंधकार को बुझाएंगे
गंगाजल की तरह शुद्ध हमारे आचरण को बनायेंगे 
खुद तो शुद्ध बनेंगे ही, औरों को भी पवित्र बनायेंगे
महापुरुषों और देवों  की तरह सदाचार अपनाएंगे
तारों की तरह टूटेंगे नहीं सूर्य की तरह सदा  जगमगायेंगे 
मौकों को तालेशेंगे नहीं , खुद को मौका बनायेंगे 
परजीवियों  की तरह रेंगेंगे नहीं , परिंदों की तरह उड़ के दिखलायेंगे
राष्ट्र को ही नहीं ,समूची मानवता को इस जीवन में कुछ नया देकर जायेंगे |
 

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Comment

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Comment by Rohit Dubey "योद्धा " on May 30, 2012 at 10:22pm

Bahut bahut dhanyawad aap sabhi priyajano ka ..............Dr.Prachi Singh jee , UMASHANKER MISHRA jee rajesh kumari jee bahut bahut dhanyawad


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 30, 2012 at 10:06pm

आत्म विशवास से ओतप्रोत रचना बहुत उत्कृष्ट भाव ....बधाई आपको 

Comment by UMASHANKER MISHRA on May 30, 2012 at 10:00pm

सकारात्मक, नवजवानों में बी कोम्प्लेक्स को प्रवाहित कर देने वाली रचना

आपके विचार आपकी भावनाओं को ईश्वर बनाये रखे ...बधाई


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 30, 2012 at 9:01pm

आपके बुलंद हौसलों का हार्दिक अभिवादन.. इस रचना हेतु बहुत बहुत बधाई रोहित दूबे जी 

कृपया ध्यान दे...

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