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मास है ये श्री शिव महेश का बाबाजी



क्या बतलाऊं हाल देश का बाबाजी
झगड़ा, टंटा, हठ, क्लेश का बाबाजी

माल स्वदेशी कौन ख़रीदे  भारत में
सबको चस्का है विदेश का बाबाजी

कालिख भ्रष्टाचार की किस दिन जायेगी
धोला हो गया रंग केश का बाबाजी 

पाखंडियों  ने  इतना पापाचार किया
मान घट गया भगवा वेश का बाबाजी

वे भी अमेरिकन घुटनों पर चलते हैं
नारा जिनका था स्वदेश का बाबाजी

सावन आया, बम भोले की गूंज उठी
मास है ये श्री शिव महेश का बाबाजी

दिखे नहीं महा उत्सव में वे 'अलबेला'
पता करो 'बागी' गणेश का बाबाजी

_अलबेला खत्री

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Comment

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Comment by Albela Khatri on July 12, 2012 at 7:27am

आदरणीय उमाशंकर जी,
सुप्रभात -नमस्कार
बहुत ही प्यारी और रससिक्त  टिपण्णी की है आपने ....बांच कर मन बल्लियों उछलने लगा है

धन्यवाद हुज़ूर !

Comment by UMASHANKER MISHRA on July 11, 2012 at 10:52pm

बहुत बढ़िया व्यंग

कई जगह में बहुत उम्दा किस्म के  शाट लगाये गये है बंधु दिल गद गद हो गया व्यवस्था से लेकर आडम्बरो को भी धोया मज़ा आ गया वे भी अमेरिकन घुटनों पर चलते हैं
नारा जिनका था स्वदेश का बाबाजी ......यहाँ तो गज़ब किया भैय्या गज़ब कियो रे सावन आया, बम भोले की गूंज उठी...हर हर महादेव

दिखे नहीं महा उत्सव में वे 'अलबेला'
पता करो 'बागी' गणेश का बाबाजी........सच फरमाया सावन क महीना है और गणेश  जी नज़र नहीं आये .............. आपकी खुपिया आँखों से क्या कोई बच पायेगा

आदरणीय अलबेला जी  तीखे  व्यंग को प्रणाम

हास्य व्यंग का अद्भुत प्रदर्शन बधाई ही बधाई

Comment by Albela Khatri on July 11, 2012 at 10:17pm

धन्यवाद  दीप्ति जी...........

__आपके स्नेहिल प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद

Comment by Albela Khatri on July 11, 2012 at 10:12pm

आदरणीय संदीप द्विवेदी जी.....
आपकी सराहना ने मन को प्रफुल्लित कर दिया
ऊर्जस्वित कर दिया ......
___आभार

Comment by deepti sharma on July 11, 2012 at 7:22pm

वाह वाह बहुत खूब

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on July 11, 2012 at 1:57pm

पाखण्डियों ने इतना पापाचार किया
मान घट गया भगवा वेश का बाबाजी-------- वाह साहब वाह.. क्या कटाक्ष किया है बिलकुल तिलमिला देने वाला..

और सावन की महिमा का क्या ख़ूब बखान किया आपने... ह्रदय आनंदित हो उठा..

बम-बम भोले..!!

सादर,

Comment by Albela Khatri on July 10, 2012 at 11:02pm

बस उन्हीं का इन्तेज़ार है आशीष यादव जी.......
आएगा ........आएगा .....आएगा, आएगा आने वाला ...आएगा ..........
हा हा हा हा
__धन्यवाद आशीष जी, आपकी सराहना सर आँखों पर

Comment by आशीष यादव on July 10, 2012 at 10:52pm

वाह, हास्य का पुट आप बड़ी आसानी से निकाल लेते हैं। बहुत ही सुन्दर।
बागी जी, आप कहाँ है, आइये यहाँ और हाजिरी लगवा जाइये। महा-उत्सव मे तो दिखे नही।

Comment by Albela Khatri on July 10, 2012 at 10:46pm

आदरणीय सौरभ जी........
यही तो कर्म है कवि का...........

 जहाँ लोग न पहुंचे कभी
वहां कवि पहुँच जाए अभी......हा हा हा ये तो जुमला बन गया .जय हो !

___समाज की विसंगतियों पर  ही नज़र न डालें अथवा लोगों को न चेतायें तो फिर कविता करनी ही क्यों ?

____आपने सराहा और इस तथ्य पर गौर किया ....आभारी हूँ


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 10, 2012 at 10:04pm

पाखंडियों  ने  इतना पापाचार किया
मान घट गया भगवा वेश का बाबाजी

क्या कहा जाय ? आपने उस ओर इशारा किया है जिस ओर लोग अक्सर देखने और फिर समझने की ज़हमत नहीं उठा रहे आज. बहुत खूब.

 

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