For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

============= गीत =============

मेरी इबादत हो तुम्ही, मेरा हो पूजन, ऐ मेरे सजन
मेरा ये तन औ ये मन, तुमको है अर्पण, ऐ मेरे सजन

सुबहो शाम, रात दिन, याद मुझे आ रहे
वो बिताये पल सुहाने नैनों में समा रहे
खिल रहे नए पुष्प, मन की वाटिका में गा रहे
तुमसे ही चलती हैं साँसे तुमसे है जीवन, ऐ मेरे सजन

मेरी इबादत हो तुम्ही, मेरा हो पूजन, ऐ मेरे सजन
मेरा ये तन औ ये मन, तुमको है अर्पण, ऐ मेरे सजन

छा रहे है मेघ घने आपकी ही प्रीत के
मस्त हवाओं के झोंके गा रहे हैं गीत से
हार के सब कुछ मैं अपना ख्वाब देखूं जीत के
प्रेम की बारिश से जैसे जल रहा है मन, ऐ मेरे सजन

मेरी इबादत हो तुम्ही, मेरा हो पूजन, ऐ मेरे सजन
मेरा ये तन औ ये मन, तुमको है अर्पण, ऐ मेरे सजन

नैन हैं मधुकर से तेरे, होंठ लगे फूल से
चाँद से चहरे के आगे, सब लगे हैं धूल से
डर रहे हैं दिल कभी दुखे न मुझसे भूल से
तुम धरा हो ये हसीं या हो तुम गगन, ऐ मेरे सजन

मेरी इबादत हो तुम्ही, मेरा हो पूजन, ऐ मेरे सजन
मेरा ये तन औ ये मन, तुमको है अर्पण, ऐ मेरे सजन

संदीप पटेल "दीप"

Views: 450

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on July 24, 2012 at 10:35am

आदरणीय अलबेला सर जी आपकी वाह से तो गीत में प्राण आ गए लगता  है स्नेह बनाये रखिये
सादर धन्यवाद सहित सादर आभार

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on July 24, 2012 at 10:34am

आदरणीय अम्बरीश सर जी आपकी इस प्रतिक्रिया का प्रसाद पा कर मैं धन्य अनुभव कर रहा हूँ
इसी तरह मार्गदर्शन और उत्साह वर्धन की अभिलाषा रहेगी सदैव आपका कोटि कोटि आभार

Comment by Er. Ambarish Srivastava on July 23, 2012 at 4:53pm

//मेरी इबादत हो तुम्ही, मेरा हो पूजन, ऐ मेरे सजन
मेरा ये तन औ ये मन, तुमको है अर्पण, ऐ मेरे सजन//

मित्र संदीप जी, गीत रचने का बहुत अच्छा प्रयास किया है आपने .....बहुत बहुत बधाई मित्र ! अभ्यास करते रहिये ...निखार स्वतः आता रहेगा ... सस्नेह

Comment by Albela Khatri on July 22, 2012 at 11:16pm

वाह वाह
बहुत सुन्दर
हार के सब कुछ मैं अपना ख्वाब देखूं जीत के
प्रेम की बारिश से जैसे जल रहा है मन, ऐ मेरे सजन

__बधाई इस प्यारी रचना के लिए संदीप जी

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on July 22, 2012 at 10:03am

बहुत बहुत धन्यवाद आपका आ. राज तोमर जी
सादर आभार

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on July 22, 2012 at 10:03am

बहुत बहुत आभार भाई अरुण जी स्नेह बनाये रखिये

Comment by Raj Tomar on July 21, 2012 at 5:35pm

छा रहे है मेघ घने आपकी ही प्रीत के 
मस्त हवाओं के झोंके गा रहे हैं गीत से 
हार के सब कुछ मैं अपना ख्वाब देखूं जीत के 
प्रेम की बारिश से जैसे जल रहा है मन, ऐ मेरे सजन "
बहुत ही शानदार, भाई साब  ..:)

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 21, 2012 at 1:23pm

सुन्दर गीत संदीप जी, बधाई स्वीकार कीजिये.....

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Feb 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service