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समस्त ओबीओ परिवार की ओर से आप सभी को श्रावणी पर्व (रक्षा बंधन) की हार्दिक बधाई !

 

कह-मुकरी

मन-मोहक मृदु रूप में आये.

सजे कलाई अति मन भाये.

नेह-प्रीति की वह है साखी.

क्या सखि कंगन? नहिं सखि राखी!!

 

रूपमाला/मदन छंद

आज वसुधा है खिली ऋतु, पावसी शृंगार. 

थाल बहना बन सजाये, श्रावणी त्यौहार.

बादलों से वृष्टि रस की, नेह की जलधार.  

इन्द्रधनुषी राखियों से, बँध गया संसार..

 

कुंडलिया

भैया-बहना की हँसी, राखी का त्यौहार.

पावन धागे नेह के, आपस में हो प्यार.

आपस में हो प्यार, दूर हों पथ के काँटे.

प्यार बने आधार, सभी में खुशियाँ बाँटे.

‘अम्बरीष’ है नित्य, सभी से मिलकर रहना.

खिला-खिला संसार, खिले हैं भैया-बहना.. 

 

समस्त ओबीओ परिवार की ओर से आप सभी को श्रावणी पर्व (रक्षा बंधन) की हार्दिक बधाई ! सादर

--अम्बरीष श्रीवास्तव

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Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on August 3, 2012 at 10:15am

वाह अम्बरीश सर, क्या खूबसूरत प्रस्तुति....बधाई.....

Comment by satish mapatpuri on August 3, 2012 at 1:56am

तीनों रचनाएँ बहुत ही सुन्दर हैं ..... ब्रम्हा , विष्णु , महेश . इस पर्व की हार्दिक बधाई मित्रवर

Comment by Er. Ambarish Srivastava on August 2, 2012 at 11:59pm

धन्यवाद रेखा जी , आपका हार्दिक स्वागत है .......आपको भी श्रावणी पर्व की हार्दिक बधाई ! सादर

Comment by Rekha Joshi on August 2, 2012 at 11:13pm

आदरणीय अम्बरीश जी ,आपको रक्षाबन्धन के पर्व की शुभकामनाये औरतीनो ही उत्कृष्ट छन्दों के किये हार्दिक बधाई 

Comment by Er. Ambarish Srivastava on August 2, 2012 at 10:55pm

आदरणीय लक्ष्मण साहब, सराहना के लिए हार्दिक आभार ....आपको भी श्रावणी पर्व की हार्दिक बधाई ! सादर

Comment by Er. Ambarish Srivastava on August 2, 2012 at 10:54pm

छंद सराहे आपने, भाई जी आभार.

स्वागत संजय मित्रवर, सुखद रहे त्यौहार ..सस्नेह

Comment by Er. Ambarish Srivastava on August 2, 2012 at 10:49pm

स्वागत है आदरेया राजेश कुमारी जी , छंदों की सराहना के लिए हार्दिक आभार .....आपको भी श्रावणी पर्व (रक्षा बंधन) की हार्दिक बधाई ! सादर

Comment by Er. Ambarish Srivastava on August 2, 2012 at 10:48pm

अवश्य प्रदीप जी ! स्वागतम स्वागतम ! हार्दिक आभार मित्रवर ....आपको श्रावणी पर्व (रक्षा बंधन) की हार्दिक बधाई ! सादर

Comment by Er. Ambarish Srivastava on August 2, 2012 at 10:47pm

स्वागत है आदरणीय भ्रमर जी ! प्रतिक्रिया हेतु हार्दिक आभार ! आपको श्रावणी पर्व (रक्षा बंधन) की हार्दिक बधाई ! सादर

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on August 2, 2012 at 7:35pm

आदरणीय भाई श्री अम्बरीश जी, सादर नमन कह मुकरी, रूपमाला छंद, और कुण्डलिया बहुत सुन्दर भाव लिए उत्कृष्ठ रचनाए,

जो मुझ जैसे को सीखने की द्रष्टि से भी संग्रहनीय |हार्दिक बधाई एवं आभार |

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