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कबीरा खड़ा बाजार में

 [ एक ]

कठपुतली भी हँस रही, देख मनुज का हाल.
सबसे बड़ा मदारी वो , लिखे जो सबका भाल.
कौन नचाता है किसे, क्या इसका परमान.
सबकी डोर पे पकड़ जिसे, कहते कृपानिधान.
 जिस उर में लालच बसे ,वहाँ कहाँ ईमान .
देय वस्तु पर नेह जिसे , सबसे बड़ा नादान.
जीवन गगरी माटी की , जिसका करम कोंहार .
सरग - नरक येही ठौर है , जिसका जस व्यवहार .
देने वाले ने दिया , एक सूर्य और सोम .
किन्तु मनुज ने बाँट ली , धरती नदियाँ व्योम .
कहत अभागा नियति का , नीयत नियत ही होत .
बिना बीज का फसल उगे , पुनि - पुनि जोते खेत .
मनुज भाग्य में का बदा, विधि भी है अनजान .
 भाग्य बंद मुठ्ठी तले , खुद को लो पहचान .
मिहनत कर जो पेट भरे , वही तो है इंसान.
उठे तो हो भगवान् जो , गिरे तो हो शैतान.
गुड्डा - गुड्डी खेलना , ये है बाल सुभाय.
कितना सुन्दर बालपन, काहे को चली जाय.
सुख और दुःख से क्यों डरें, सिक्के के दो छोर .
जैसा जो करता करम , तैसा  पावत छोर .
सब दिन एक समान ना, समय घुमता चक्र .
जस पूनम का चंद्रमा , दूज को होए बक्र.
लोभी ,कपटी , धूर्त जो , वो है श्वान समान .
दांत गड़ाये हाड़ में , करे जो निज लहू पान .
जो बेटी माता बने , ममता देई लुटाय .
सो बेटी पत्नी बने , कूल का वंश बढ़ाय .
  गर्भ में बेटी बध करे , कैसा धर्म  - रिवाज  ?
जो बेटी  होती नहीं , होत का   पुरुष - समाज ?

               ----  सतीश मापतपुरी

   

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Comment

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Comment by satish mapatpuri on August 4, 2012 at 1:06am

डॉ. सूरज साहेब , आपकी सराहना पाकर मैं धन्य हो गया . ह्रदय से आभार मित्रवर

Comment by satish mapatpuri on August 4, 2012 at 1:04am

सम्मानित रेखा जी , मेरी रचना आपको पसंद आई ,मेरा श्रम सार्थक  हुआ. धन्यवाद .

Comment by satish mapatpuri on August 4, 2012 at 1:02am

आभार अरुण जी

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on August 3, 2012 at 11:01pm

सतीश जी सादर नमस्कार ! इंन सुन्दर दोहों के माध्यम से आपने जीवन के बिभिन्न आयामों को बड़ी खूबसूरती से पेश किया है। मन करता है बार बार पढ़ते रहें.....आपको इस सुंदर कृति पर लाख लाख बधाइयाँ !!

Comment by Rekha Joshi on August 3, 2012 at 7:24pm

जो बेटी माता बने , ममता देई लुटाय . 
सो बेटी पत्नी बने , कूल का वंश बढ़ाय .
  गर्भ में बेटी बध करे , कैसा धर्म  - रिवाज  ?
जो बेटी  होती नहीं , होत का   पुरुष - समाज ?,अति सुंदर रचना पर मेरी हार्दिक बधाई सतीश जी 

Comment by अरुन 'अनन्त' on August 3, 2012 at 11:36am

आदरणीय सतीश जी बेहतरीन रचना , बहुत -खूब बधाई हो बधाई....

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