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ज़िन्दगी खुद में ही तो एक जंग का एलान है.

ज़िन्दों और परिंदों का बस एक ही पहचान है.
ना ही थकना, ना ही रुकना बस और बस उड़ान है.
एक जगह जो रुक गया तो रुक गया उसका सफ़र.
इसलिए ही अब तो मंजिल रोज़ एक मुकाम है.
कौन कहता है जहां में ज़िंदा रहना है कठिन.
आदमी में है ही क्या एक जिस्म और एक जान है.
मौसमे बारिश गिरा देता है कितने आशियाँ .
हिम्मते मरदा है जो कि हर तरफ मकान है.
ज़िन्दगी में जंग ना तो क्या मज़ा मापतपुरी.
ज़िन्दगी खुद में ही तो एक जंग का एलान है.
          ----- सतीश मापतपुरी

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Comment by JAWAHAR LAL SINGH on May 8, 2012 at 4:56am

ज़िन्दगी में जंग ना तो क्या मज़ा मापतपुरी.
ज़िन्दगी खुद में ही तो एक जंग का एलान है.

बहुत सार्थक और सकारात्मक उपदेश देती रचना ! आदरणीय सतीश जी, आपको बधाई!

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on May 5, 2012 at 8:52am

आदरणीय सतीश जी सादर प्रणाम

जिंदगी की सही परिभाषा दी आपने, जिंदगी एक जंग ही तो है.
Comment by MAHIMA SHREE on April 25, 2012 at 3:15pm
ज़िन्दों और परिंदों का बस एक ही पहचान है.
ना ही थकना, ना ही रुकना बस और बस उड़ान है. ...
आदरणीय सतीश सर ,नमस्कार
वाह...... सर जीवन में होसले भरती रचना के लिए बधाई स्वीकार करे
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 24, 2012 at 12:40pm

ज़िन्दगी में जंग ना तो क्या मज़ा मापतपुरी. 
ज़िन्दगी खुद में ही तो एक जंग का एलान है.

आदरणीय सतीश जी, सादर अभिवादन, 
प्रेणादायक सुन्दर भाव युक्त रचना. संगर्ष, जंग, जिंदगी वाह जी वाह.  बधाई.


Comment by राकेश त्रिपाठी 'बस्तीवी' on April 24, 2012 at 6:58am

aadarneey Satish ji Sadar namaskar, Motiyon ki ladi me ye do heere lage:

कौन कहता है जहां में ज़िंदा रहना है कठिन.
आदमी में है ही क्या एक जिस्म और एक जान है.................Ekla chalo re, Ekatmvaad :)
मौसमे बारिश गिरा देता है कितने आशियाँ .
हिम्मते मरदा है जो कि हर तरफ मकान है..............This is the Best; Bhuj Gujraatiyon ki yaad aati hai, jahan Bahut jyada paani na hone par bhi ekdam aage hain.

Bahut bahut badhai.

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on April 24, 2012 at 2:45am

मौसमे बारिश गिरा देता है कितने आशियाँ .
हिम्मते मरदा है जो कि हर तरफ मकान है
इस बात का कोई जवाब नहीं है गुरुवर...!! बहुत ख़ूब...

Comment by satish mapatpuri on April 24, 2012 at 12:40am

राजेश कुमारी जी , अविनाश जी और मृदु जी आपका दिल से आभार

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on April 23, 2012 at 10:46pm

ज़िन्दगी खुद में ही तो एक जंग का एलान है.

हार्दिक बधाई खूबसूरत भावाभियक्ति पर

Comment by AVINASH S BAGDE on April 23, 2012 at 11:23am

मौसमे बारिश गिरा देता है कितने आशियाँ .
हिम्मते मरदा है जो कि हर तरफ मकान है....realy आशा का संचार करती, आत्मशक्ति आत्मविश्वास को जगाती रचना...


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 23, 2012 at 9:51am

आशा का संचार करती आत्मशक्ति आत्मविश्वास को जगाती रचना बहुत खूब सतीश मापतपुरी जी ..बधाई 

कृपया ध्यान दे...

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