For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

घनाक्षरी और कुंडलिया छंद

श्याम  घन माला बिच दामिनी दमकती ज्यों,घनश्याम अंक गोरी राधिका समा रही 

बरखा की बूँद मानो टोली गोप-गोपियों की, नाच नाच नाच मुद् मंगल मना रही 

पवन की डोरियाँ डोलाय  रहीं झूलानिया  कृष्ण-कृष्णप्रिया द्वै को झूलनी झुला रही 

लख लख प्रकृति के रूप ये अनूप गूँज  ,राधे-कृष्ण, राधे-कृष्ण चहूँ दिसी  छा रहीं 

 

कुटिया कुटीर डूब रहे दृग सलिल मे,कब प्रिय मेघ मेरे अंगना पधारोगे 

जलती अवनि बिन जल प्यासी सूख रही,कब इन्द्र देव कृपा अपनी उतारोगे

पावस मे पावक से खेत-खेत जल रहा ,धान बाजरा की कब अरजी विचारोगे

ताप संग जल रहे स्वप्न कौल आस सभी , बोलो देवराज कैसे विनती स्वीकारोगे 

जब-जब होगी धर्म की ,हानि धरा पर नाथ l

आओगे तुम तारने ,चक्र थाम कर हाथ ll

चक्र थाम कर हाथ ,वचन जो दिया निभाओ 

धर्म ध्वजा झुक रही ,व्यस्तता तज झट आओ 

गर न लिया संज्ञान ,अभी भी तो सुन योगी ,

व्यंग करेंगे लोग बात यह जब जब होगी l

आतंकी साये तले ,आजादी की रीत ,

गाती बुलबुल कैद मे ,स्वतंत्रता के गीत 

स्वतंत्रता के गीत,यही है क्या  आजादी 

जनता पर प्रतिबन्ध ,खुले मे हैं उन्मादी 

पता नहीं किस ओर, अचानक बम फट जाये 

घूम रहे बेफिक्र , यहाँ  आतंकी   साये  

Views: 537

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by seema agrawal on August 13, 2012 at 8:08pm

शुक्रिया अम्बरीश जी 

Comment by Er. Ambarish Srivastava on August 13, 2012 at 2:42pm

//कुटिया कुटीर डूब रहे दृग सलिल मे,कब प्रिय मेघ मेरे अंगना पधारोगे 

जलती अवनि बिन जल प्यासी सूख रही,कब इन्द्र देव कृपा अपनी उतारोगे

पावस मे पावक से खेत-खेत जल रहा ,धान बाजरा की कब अरजी विचारोगे

ताप संग जल रहे स्वप्न कौल आस सभी , बोलो देवराज कैसे विनती स्वीकारोगे//

आदरेया सीमा जी ! अत्यंत प्रवाहपूर्ण सामयिक घनाक्षरी रची है आपने ! पहली घनाक्षरी का भी कोई  जवाब नहीं !

//

आतंकी साये तले ,आजादी की रीत ,

गाती बुलबुल कैद मे ,स्वतंत्रता के गीत 

स्वतंत्रता के गीत,यही है क्या  आजादी 

जनता पर प्रतिबन्ध ,खुले मे हैं उन्मादी 

पता नहीं किस ओर, अचानक बम फट जाये 

घूम रहे बेफिक्र , यहाँ  आतंकी   साये//

क्या कहने ! समय की मांग को संतुष्ट करता हुए यह कुंडलिया बहुत अच्छा लगा ! बहुत-बहुत बधाई आपको .....

उपरोक्त चारों ही  छंद बेहतरीन है, ......पुनः हार्दिक बधाई .....सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
18 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service