For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मिट्टी को रंग के लाल-हरे रंग दे दिये
लिख-लिख किताबें सोंचने के ढंग दे दिए
देनी थीं वुसअतें तो खुले आसमान सी
धर्मो ने दायरे बड़े ही तंग दे दिए


चन्दन गुल या इत्र की खुशबू,जिसको होना है हो जाए 
घूमे जंगल-जंगल ,महके उपवन-उपवन धूम मचाए 
पर ,ख़ुलूस से बढ़ कर कोई गंध नहीं है इस दुनिया में 
जो बिखरे इस दर इठलाकर उस दर की देहरी महकाए


ईमान अब संदेह का पर्याय हो गया 
इंसानियत का भाव नष्टप्राय हो गया 
कुअरान,बाइबिल या कि गीता पढ़ी तो क्या 
संकीर्ण ही जब आपका अभिप्राय हो गया

Views: 717

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by PHOOL SINGH on September 1, 2012 at 12:25pm

सीमा जी प्रणाम

 

बहुत सुन्दर मुक्तक  बधाई

फूल सिंह

Comment by Ashok Kumar Raktale on August 25, 2012 at 11:44pm

ईमान अब संदेह का पर्याय हो गया 
इंसानियत का भाव नष्टप्राय हो गया 
कुअरान,बाइबिल या कि गीता पढ़ी तो क्या 
संकीर्ण ही जब आपका अभिप्राय हो गया

बहुत सुन्दर मुक्तक सीमा जी बधाई स्वीकारें.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 25, 2012 at 9:22am

ईमान अब संदेह का पर्याय हो गया 
इंसानियत का भाव नष्टप्राय हो गया ---वाह सीमा जी लाख टके की बात कह दी ---अतिसुन्दर तीनो मुक्तक एक से बढ़कर एक बहुत बधाई 

Comment by seema agrawal on August 25, 2012 at 12:07am

स्वागत है रेखा जी ...बहुत बहुत धन्यवाद 

Comment by seema agrawal on August 25, 2012 at 12:02am

आदरणीय योगराज जी आपने जिस स्नेह के साथ तीनो मुक्तकों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है वो मेरे लिए किसी पारितोषिक से कम नहीं है

 दिल से शुक्रिया आपका ........

Comment by Rekha Joshi on August 24, 2012 at 8:40pm

ईमान अब संदेह का पर्याय हो गया 
इंसानियत का भाव नष्टप्राय हो गया 
कुअरान,बाइबिल या कि गीता पढ़ी तो क्या 
संकीर्ण ही जब आपका अभिप्राय हो गया,बहुत खूब सीमा जी बहुत बढ़िया ,हार्दिक बधाई 


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on August 24, 2012 at 7:37pm

//मिट्टी को रंग के लाल-हरे रंग दे दिये
लिख-लिख किताबें सोंचने के ढंग दे दिए
देनी थीं वुसअतें तो खुले आसमान सी
धर्मो ने दायरे बड़े ही तंग दे दिए// 
वाह सीमा जी वाह, धर्मों द्वारा दायरे संकुचित करने का ख्याल बेहद सुन्दर लगा. 

//चन्दन गुल या इत्र की खुशबू,जिसको होना है हो जाए 
घूमे जंगल-जंगल ,महके उपवन-उपवन धूम मचाए 
पर ,ख़ुलूस से बढ़ कर कोई गंध नहीं है इस दुनिया में 
जो बिखरे इस दर इठलाकर उस दर की देहरी महकाए// 
 //ख़ुलूस से बढ़ कर कोई गंध नहीं है इस दुनिया में// बहुत  ही सच्ची और सुच्ची बात कही है - वाह.  

//ईमान अब संदेह का पर्याय हो गया 
इंसानियत का भाव नष्टप्राय हो गया 
कुअरान,बाइबिल या कि गीता पढ़ी तो क्या 
संकीर्ण ही जब आपका अभिप्राय हो गया// 
बहुत गहरी बातें कहीं हैं यहाँ भी. ईमान जब संदेह का पर्याय हो जाये तो एक संवेदनशील कलम इसी तरह क्रन्दन करती है. बधाई स्वीकारें. 

Comment by seema agrawal on August 24, 2012 at 7:20pm

धन्यवाद नवल किशोर जी 

Comment by seema agrawal on August 24, 2012 at 7:19pm

शुक्रिया अलबेला जी 

Comment by Naval Kishor Soni on August 24, 2012 at 3:24pm

बहुत खूब .........बधाई  seema ji !

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी, पोस्ट पर आने एवं अपने विचारों से मार्ग दर्शन के लिए हार्दिक आभार।"
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"सादर नमस्कार। पति-पत्नी संबंधों में यकायक तनाव आने और कोर्ट-कचहरी तक जाकर‌ वापस सकारात्मक…"
6 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदाब। सोशल मीडियाई मित्रता के चलन के एक पहलू को उजागर करती सांकेतिक तंजदार रचना हेतु हार्दिक बधाई…"
6 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"सादर नमस्कार।‌ रचना पटल पर अपना अमूल्य समय देकर रचना के संदेश पर समीक्षात्मक टिप्पणी और…"
6 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर समय देकर रचना के मर्म पर समीक्षात्मक टिप्पणी और प्रोत्साहन हेतु हार्दिक…"
6 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी, आपकी लघु कथा हम भारतीयों की विदेश में रहने वालों के प्रति जो…"
6 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय मनन कुमार जी, आपने इतनी संक्षेप में बात को प्रसतुत कर सारी कहानी बता दी। इसे कहते हे बात…"
6 hours ago
AMAN SINHA and रौशन जसवाल विक्षिप्‍त are now friends
7 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय मिथलेश वामनकर जी, प्रेत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
7 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय Dayaram Methani जी, लघुकथा का बहुत बढ़िया प्रयास हुआ है। इस प्रस्तुति हेतु हार्दिक…"
8 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"क्या बात है! ये लघुकथा तो सीधी सादी लगती है, लेकिन अंदर का 'चटाक' इतना जोरदार है कि कान…"
9 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय Sheikh Shahzad Usmani जी, अपने शीर्षक को सार्थक करती बहुत बढ़िया लघुकथा है। यह…"
9 hours ago

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service