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गज़ल:याद जाने कहाँ

याद जाने कहाँ खो गयी,
बात आयी गयी हो गयी .

दिन में हल मैं चलाता रहा,
रात में बीज वो बो गयी.

बंद थीं मछलियाँ जार में,
तितली पानी से पर धो गयी.

बाद मुद्दत के आयी खुशी ,
मेरे हालात पर रो गयी.

तुमने बच्ची को डाटा बहुत ,
लेके टेडी बीयर सो गयी.

उसकी यादों में खोया था मैं,
इसका तस्कीन कर वो गयी.

एक नौका नदी से मिली ,
और मंझधार में खो गयी.

माँ ने कुछ भी तो पूछा न था,
कैसे मन को मेरे टो गयी.

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 11, 2010 at 9:53am
बंद थीं मछलियाँ जार में,
तितली पानी से पर धो गयी,

वाह वाह अभिनव साहब, अद्भुत ख्यालात की परिणति है यह ग़ज़ल , बहुत ही खुबसूरत प्रस्तुति, कमाल है, बधाई स्वीकार करे |

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