For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गज़ल - आंधियां चल दीं

आंधियां चल दीं आज़मानें सौ ,
गढ़ लिए हमने आशियानें सौ.

जिनकी हस्ती नहीं बसाने की ,
वो चले बस्तियां ढहानें सौ.

पुलिस के वास्ते बस एक थाना ,
माफिया के यहाँ ठिकानें सौ.

जीते जी तो हुआ न कोई एक,
अब मरा है चले नहानें सौ.

सफेदी ज़ुल्फ़ की यूँ ही तो नहीं ,
एक दिल यहाँ फसानें सौ.

लाख हैं बालियाँ चिडियाँ दस बीस,
खेत में बन गयीं मचानें सौ.

कटी उस ओर है खुशियों की पतंग,
लूटने चल दिए दीवानें सौ.

उनकी बातों में इन्कलाब नहीं,
नारे कहते हमें लगाने सौ.

उनकी मुस्कान नें किया आगाह,
ज़ख्म मुझको भी हैं छुपाने सौ.

मैं किसी तरह सो नहीं पाया,
ख्वाब आये मेरे सिरहाने सौ.

Views: 412

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Abhinav Arun on December 23, 2012 at 11:53am

ये गज़ल आज के दैनिक जागरण वाराणसी  मे प्रकाशित हुई है -सादर सूचनार्थ -- 

http://in.jagran.yahoo.com/epaper/index.php?location=40&edition... 

Comment by Abhinav Arun on April 25, 2012 at 9:39am

शुक्रिया श्री आशीष जी और हाँ पूर्व में इसे पसंद कर टिप्पणी देने वाले श्री प्रीतम जी और श्री बागी भाई को भी हार्दिक आभार !!

Comment by आशीष यादव on April 25, 2012 at 9:20am
पहली बार नजर पड़ी इस रचना पर। अच्छी रचना है। तथ्य कथ्य खूबसूरत
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on October 25, 2010 at 12:33pm
आंधियां चल दीं आज़मानें सौ ,
गढ़ लिए हमने आशियानें सौ.

जिनकी हस्ती नहीं बसाने की ,
वो चले बस्तियां ढहानें सौ.

वाह अरुण भाई वाह....बहुत ही शानदार रचना है भाई.....सारे के सारे पंक्तियाँ पसंद आये....धन्यबाद इस रचना के लिए...
शुभकामनाये..

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 17, 2010 at 4:35pm
वाह वाह वाह भाई अरुण जी, बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल पढ़ी है आपने , सभी शे'र अच्छे लगे, बहुत ही उम्द्दा प्रस्तुति, बधाई आपको,

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। चौपाइयों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार। तुकांतता के दोष में…"
24 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अखिलेश जी, सादर अभिवादन। चौपाइयों पर उपस्थिति, स्नेह और मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। आपकी…"
30 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक धन्यवाद आभार आपका लक्ष्मण भाईजी"
1 hour ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक धन्यवाद लक्ष्मण भाई "
1 hour ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी आदरणीय अशोक भाईजी  चौपाई में चित्र का  सम्पूर्ण  चित्रण हुआ है।…"
1 hour ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"चप्पल उसकी सिली न जाती। बिन चप्पल के वह रह जाती।।....वाह ! वाह ! प्रदत्त चित्र की आत्मा का भाव आपने…"
2 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण भाईजी चित्र को विस्तार से छंद बद्ध करने के लिए हार्दिक बधाई । कुछ त्रुटियाँ मेरी नजर…"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त चित्र को साकार करती बहुत सुंदर चौपाइयाँ हुई हैं। बहुत बहुत…"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अखिलेश जी, यह संशोधित छंद और भी उत्तम हुए हैं। यह पूर्ण रूप से चित्र को संतुलित कर रहे हैं।…"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अखिलेश जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त चित्र पर सुंदर छंद हुए हैं । हार्दिक बधाई।"
6 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई छंद ( संशोधित) +++++++++++++++ स्थान एक तीरथ लगता है। जमघट संतों का रहता है॥ कितनी सुंदर है…"
6 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  आपका कहन सही है। इतनी सुंदर  गोरी चिट्टी  कन्या पर ध्यान ही नहीं…"
7 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service