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ग़ज़ल-भावनाओं से खाली हृदय हो गये।

भावनाओं से खाली हृदय हो गये।
लोग हारे हैं पत्थर विजय हो गये।।

आँखें रह जाती हैं बस खुली की खुली
आज ऐसे भयानक दृश्य हो गये।

आदमी के लिये सिर्फ पृथ्वी नहीं
दूसरे भी ग्रहों के विषय हो गये।

न्याय की आस में बैठा है आमजन
अन्त आरोप उस पर ही तय हो गये।

प्रेम में पहले जैसी न गर्मी रही
रिश्ते खामोशियों में विलय हो गये।

प्रेम सम्बन्ध उनसे बनाओ “सुजान”
प्रेम से जिनके कोमल हृदय हो गये।।

  • सूबे सिंह “सुजान”

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Comment by Rekha Joshi on September 21, 2012 at 7:13pm

भावनाओं से खाली हृदय हो गये।
लोग हारे हैं पत्थर विजय हो गये।।,अति सुंदर अभिव्यक्ति आदरणीय सूबे सिंह जी ,हार्दिक बधाई 

Comment by UMASHANKER MISHRA on September 21, 2012 at 12:36pm

भावनाओं से खाली हृदय हो गये।
लोग हारे हैं पत्थर विजय हो गये।। पत्थर दिल की जीत 

बहुत खूबी से बयाँ किया है 

न्याय की आस में बैठा है आमजन
अन्त आरोप उस पर ही तय हो गये। बहुत खूब है 

प्रिय सुबे सिंग जी हार्दिक बधाई सुन्दर गज़ल है 

Comment by सूबे सिंह सुजान on September 21, 2012 at 10:02am

vinus ji,वीनस केसरी..........shukriya

Comment by वीनस केसरी on September 21, 2012 at 12:49am

वाह,
ग़ज़ल का तेवर बेहद पसंद आया

//न्याय की आस में बैठा है आमजन
अन्त आरोप उस पर ही तय हो गये।//

मुझे भी यह शेर बेहद पसंद आया ....

Comment by सूबे सिंह सुजान on September 20, 2012 at 10:38pm

Er. Ganesh jee "Bagi"..........आपकी बात सही है.......यह काफिया ग़ज़ल से बाहर हो गया है।।।

आपकी सटीक प्रतिक्रिया पर मुझे बहुत अच्छा लगा ।.

Comment by सूबे सिंह सुजान on September 20, 2012 at 10:34pm

योगराज जी शुक्रिया......यह एक चार साल पुरानी ग़ज़ल  आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ..........पढ कर उस्ताद लोग बतायें कि कितना सहीह कह पाया हूँ।


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 20, 2012 at 10:32pm

//न्याय की आस में बैठा है आमजन
अन्त आरोप उस पर ही तय हो गये।//

बहुत ही सुन्दर कहन, प्यारा शेर, अच्छी ग़ज़ल |

//आज ऐसे भयानक दृश्य हो गये।//

इस मिसरे पर गौर करें, मुझे लगता है कि ह्रदय और विजय के साथ दृश्य काफिया यहाँ सही नहीं है |

इस प्रस्तुति पर दाद कुबूल करें सुजान साहब | आगे भी आपकी और रचनाओं का और अन्य साथियों की रचनाओं पर आपके विचारों का इन्तजार रहेगा |

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