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धूप के दरिया में नहाता है गुलाब

धूप के दरिया में नहाता है गुलाब
फिर भी ताज्जुब है मुस्काता है गुलाब

जिनके चेहरों पर उदासी होती है
मुस्कुराना ऐसों को सिखाता है गुलाब

जब किसी के लिए बिखरता है
तब कहीं जाके चैन पाता है गुलाब

रास्ते में बिखेर कर खुद को
साथ राही के भी जाता है ग़ुलाब

जो ज़माने में नामवर थे कभी
वाक़ए उन के सुनाता है गुलाब

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Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on October 25, 2010 at 12:27pm
जिनके चेहरों पर उदासी होती है
मुस्कुराना ऐसों को सिखाता है गुलाब

जब किसी के लिए बिखरता है
तब कहीं जाके चैन पाता है गुलाब

बहुत ही शानदार रचना आदिल भाई....और सही भी है जो पंक्तियाँ मैंने ऊपर पेस्ट किया है...मुझे ये पंक्तियाँ बहुत ही पसंद आई...

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 21, 2010 at 7:56pm
जिनके चेहरों पर उदासी होती है
मुस्कुराना ऐसों को सिखाता है गुलाब
बहुत सही कहा है आदिल भाई , हमे गुलाब से सिख लेने की जरूरत है |

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