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दिल्ली का हाल
 
यह देखो दिल्ली का हाल
त्रस्त जनता बेबस,बेहाल
महंगाई का बोझ उठाए
पूछे है  सत्ता  से सवाल 
यह देखो दिल्ली का---
चारों तरफ पैसे की भूख 
मची हुई है लूट खसूट 
बिगड़ गए सारे सुर ताल
राजनीति का अजब क्मॉल
यह देखो दिल्ली का---
जिसकी लाठी उसकी भैंस
सरकारी कर्मचारियों की ऐंठ 
भ्रष्टाचार का बोलबाला है 
छुपे हुए वर्दी में दलाल  
यह देखो दिल्ली का---
बिन रिश्वत कोई काम न होता 
आम आदमी यूँ  ही नहीं रोता 
चक्कर काटते कट जाती जिंदगी
रिश्वतखोर हुए मालामाल 
यह देखो दिल्ली का---
लम्बी लम्बी लाईनें दिखती
शमशान तक में जगह न मिलती
एडवांस बुकिंग का दौर है यारो   
अक्सर रहती है हड़ताल 
यह देखो दिल्ली का---
गुंडागर्दी है सरेआम 
छीना झपटी हो गई आम
धोटाले पर घोटाला
लम्बी खिंचती जाँच पड़ताल 
यह देखो दिल्ली का---
चारों तरफ है जाम ही जाम
कितनी गलियां हैं बदनाम
कमीं नहीं कामचोरों की
सुख शांति का पड़ा अकाल 
यह देखो दिल्ली का---
दीपक 'कुल्लुवी' कितना लिखे
कितना सोते हुओं को जगाए
इस दिल्ली की फिक्र में यारो 
उड़ गए आधे सर के बाल 
यह देखो दिल्ली का हाल 
यह देखो दिल्ली का---
दीपक कुल्लुवी 
09350078399
10 -11 -12 .

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Comment by rajesh kumari on November 11, 2012 at 2:58pm

दिल्ली का ही नहीं दीपक जी सभी जगह यही हाल  है बढती महंगाई ,जनसंख्या और प्रशासन की अव्यवस्था  ने ये हाल कर रखा है बहुत बढ़िया चित्रण किया है दिल्ली का बधाई आपको 

Comment by Deepak Sharma Kuluvi on November 10, 2012 at 4:58pm

THANKS PHOOL SINGH

BOTH WE ARE FACING SUCH TYPE OF PROBLEMS IN DELHI

Comment by PHOOL SINGH on November 10, 2012 at 12:21pm

शर्मा जी नमस्कार......

सच्चाई का बखान करती एक बहुत ही स्टिक और सुंदर रचना............बधाई स्वीकारे.....

फूल सिंह

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