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कुछ और शाम इंतज़ार सही
कुछ और दिल बेकरार सही

कुछ और रखी जिन्दगी दांव पे
कुछ और तेरा ऐतबार सही

कुछ और गम के समंदर पालूँ
कुछ और काज़ल की धार सही

कुछ और चले ये रात अँधेरी
कुछ और सर्द अंगार सही

कुछ और चाँद की ख्वाहिश मेरी
कुछ और तेरा ये प्यार सही

-पुष्यमित्र उपाध्याय

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 22, 2012 at 5:47pm

सुन्दर भावाभिव्यक्ति बहुत अच्छे 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 22, 2012 at 6:52am

पद्यात्मक अभिव्यक्ति हेतु बधाई, पुष्यमित्र भाई.

Comment by वीनस केसरी on November 22, 2012 at 3:59am

कुछ और गम के समंदर पालूँ
कुछ और काज़ल की धार सही

कुछ और चले ये रात अँधेरी
कुछ और सर्द अंगार सही

वाह पुष्पमित्र जी सुन्दर अभिव्यक्ति, बेहतरीन कहन
बधाई स्वीकारें

कृपया ध्यान दे...

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