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दुश्मन न सही काबिल-ए -ऐतबार नहीं है 
कोई भी हो वतन से जिसे प्यार नहीं है 
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गैरों से भी अपनों से भी खाता है ठोकरें 
वो शख्स जिसे खुद पे अख्तियार नहीं है 
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ज़ालिम वही गुनाह जो करता नहीं कुबूल 
पाता सजा वही जो गुनाहगार नहीं 
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बापू की सच्चाई पे उठातें हैं उँगलियाँ 
सच बोलना आता जिन्हें इक बार नहीं है 

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मल्लाह बने बैठें हैं साहिल पे जो "अजय" 
आता सम्हालना उन्हें पतवार नहीं है 
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Comment

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Comment by वीनस केसरी on December 15, 2012 at 2:36am

शानदार !!!

Comment by Dr.Ajay Khare on December 14, 2012 at 11:34am

naamrashi ji aap badia likh rahe he 

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 14, 2012 at 11:30am

अजय जी सभी के सभी अशआर वाकई काबिले तारीफ हैं बधाई स्वीकारें

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